सुप्रीम कोर्ट ने मंजूर किया उमर अब्दुल्ला और पायल अब्दुल्ला का आपसी सहमति से तलाक, 32 साल पुराने रिश्ते का हुआ अंत

सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी पत्नी पायल अब्दुल्ला के आपसी सहमति से तलाक को मंजूरी दे दी। दोनों पिछले करीब 17 वर्षों से अलग रह रहे थे और अब एक-दूसरे के खिलाफ लंबित सभी कानूनी मामले भी वापस लेने पर सहमत हो गए हैं।

नई दिल्ली | 31 जुलाई, 2026: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी पत्नी पायल अब्दुल्ला के बीच वर्षों से चल रहा वैवाहिक विवाद आखिरकार समाप्त हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों की आपसी सहमति से दायर तलाक की याचिका स्वीकार करते हुए विवाह संबंध समाप्त करने की मंजूरी दे दी। इसके साथ ही दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ लंबित सभी कानूनी मामलों को वापस लेने पर भी सहमति व्यक्त की है।

मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि दोनों पक्ष अब आपसी सहमति से अलग होने का निर्णय ले चुके हैं और अपने जीवन में आगे बढ़ना चाहते हैं। इसके बाद न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत प्राप्त विशेष अधिकारों का प्रयोग करते हुए तलाक को मंजूरी दे दी।

सर्वोच्च अदालत के फैसले के साथ दोनों के बीच लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई का भी अंत हो गया। अदालत में यह भी तय हुआ कि दोनों पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ लंबित सभी मामलों को वापस लेंगे।

उमर अब्दुल्ला और पायल की मुलाकात दिल्ली के एक होटल में काम करने के दौरान हुई थी। दोस्ती के बाद दोनों ने सितंबर 1994 में विवाह किया। इस दंपति के दो बेटे हैं। हालांकि समय के साथ रिश्तों में तनाव बढ़ा और वर्ष 2009 से दोनों अलग रहने लगे। वर्ष 2011 में उमर अब्दुल्ला ने सार्वजनिक रूप से अलग रहने की पुष्टि भी की थी।

उमर अब्दुल्ला ने शुरुआत में वैवाहिक क्रूरता के आधार पर तलाक की मांग करते हुए फैमिली कोर्ट का रुख किया था, लेकिन अदालत ने उनकी याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि लगाए गए आरोप पर्याप्त रूप से सिद्ध नहीं हो सके। इसके बाद उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दायर की, जहां दिसंबर 2023 में डिवीजन बेंच ने भी फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में पायल अब्दुल्ला को प्रति माह 1.5 लाख रुपये गुजारा भत्ता तथा बेटे की शिक्षा के लिए 60 हजार रुपये प्रतिमाह देने का निर्देश दिया था। इसके बाद उमर अब्दुल्ला ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति बनने के बाद अदालत ने विवाह समाप्त करने की अनुमति दे दी। इस फैसले के साथ लगभग 17 वर्षों से अलग रह रहे इस दंपति के लंबे पारिवारिक और कानूनी विवाद का औपचारिक रूप से अंत हो गया।

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