बाहुबलियों को कैसे मिले शस्त्र लाइसेंस? हाईकोर्ट ने राजा भैया, बृजभूषण समेत 19 लोगों पर मांगी रिपोर्ट

लखनऊ, 22 मई 2026 (यूएनएस)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में शस्त्र लाइसेंसों के दुरुपयोग और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को हथियार लाइसेंस जारी किए जाने के मामलों पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार, जिलाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब करते हुए बाहुबली और प्रभावशाली माने जाने वाले 19 लोगों के शस्त्र लाइसेंसों की जानकारी मांगी है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि हथियारों का सार्वजनिक प्रदर्शन समाज में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा करता है, जो कानून के शासन और सामाजिक शांति के खिलाफ है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि आत्मरक्षा के नाम पर हथियारों का प्रदर्शन सार्वजनिक स्थलों को डर और दबदबे के केंद्र में बदल देता है।

अदालत ने कहा कि गृह विभाग के संयुक्त सचिव द्वारा 20 मई को दाखिल हलफनामे से स्पष्ट है कि प्रदेश के सभी 75 जिलों के जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आर्म्स एक्ट 1959 और उससे संबंधित नियमों का सही तरीके से पालन नहीं कर रहे हैं। कोर्ट ने याद दिलाया कि 23 मार्च को जारी आदेश में लाइसेंस जारी करने, नवीनीकरण और हस्तांतरण को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए थे।

कोर्ट के समक्ष पेश आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में अब तक 10,08,953 शस्त्र लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं। विभिन्न श्रेणियों में 23,407 आवेदन लंबित हैं, जबकि जिलाधिकारियों के आदेशों के खिलाफ 1,738 अपीलें मंडलायुक्तों के पास लंबित हैं। अदालत ने यह भी गंभीरता से लिया कि 20,960 परिवारों के पास एक से अधिक शस्त्र लाइसेंस हैं, जबकि 6,062 ऐसे मामलों में लाइसेंस जारी किए गए, जिनमें संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ दो या अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।

हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि ऐसे सभी लाइसेंस धारकों का जिला, थाना और नामवार विवरण प्रस्तुत किया जाए। साथ ही यह भी बताया जाए कि उनके परिवार के अन्य सदस्यों के पास भी हथियार लाइसेंस हैं या नहीं। अदालत ने कहा कि प्रशासनिक कार्यवाही में निष्पक्षता और पारदर्शिता सुशासन की मूल शर्त है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों के मामलों में जरूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई और कई महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए गए हैं। अदालत ने इस पर नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है कि उन्होंने कोर्ट से कोई तथ्य नहीं छिपाया है।

हाईकोर्ट ने जिन 19 लोगों के संबंध में रिपोर्ट मांगी है उनमें रघुराज प्रताप सिंह, बृजभूषण शरण सिंह, धनंजय सिंह समेत कई अन्य नाम शामिल हैं। अदालत ने इनके पते, आपराधिक मामलों, हथियार लाइसेंस और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है।

मामले की अगली सुनवाई 26 मई 2026 को होगी।

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