नई दिल्ली, 29 जुलाई 2026। लोकसभा ने बुधवार को लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) (संशोधन) विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। पेपर लीक और संगठित परीक्षा घोटालों पर लगाम लगाने के उद्देश्य से लाए गए इस विधेयक पर दिनभर चली चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक और कई बार हंगामा भी देखने को मिला।
केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि नए संशोधन के तहत पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी होगी, जबकि विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट तीन महीने के भीतर फैसला सुनाएगी। इस तरह पूरे मामले का निस्तारण अधिकतम पांच महीने में करने का लक्ष्य रखा गया है।
‘गोली नहीं चली, सिर्फ आंसू गैस का इस्तेमाल हुआ’
लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान जितेंद्र सिंह ने हालिया प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई पर भी सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले भी स्पष्ट किया है कि किसी प्रकार की गोली नहीं चलाई गई थी, बल्कि केवल आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि गोली चलाने का आदेश देने का अधिकार किसी मंत्री के पास नहीं होता, बल्कि कानून के अनुसार यह अधिकार केवल मजिस्ट्रेट के पास होता है।
राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
विधेयक पर चर्चा के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था पहले से ही छात्रों के लिए बेहद कठिन हो चुकी है और लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने युवाओं का भरोसा कमजोर किया है।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था पर वैचारिक प्रभाव बढ़ रहा है और विश्वविद्यालयों से लेकर शिक्षा नीति तक कई फैसलों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केवल कानून सख्त करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि पूरी व्यवस्था में सुधार की जरूरत है।
हंगामे के कारण कई बार स्थगित हुई कार्यवाही
राहुल गांधी के भाषण के दौरान उनके कुछ बयानों पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने कड़ी आपत्ति जताई, जिसके बाद सदन में हंगामा शुरू हो गया। स्थिति को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पहले कार्यवाही को दोपहर 2:30 बजे तक और बाद में 3:00 बजे तक स्थगित कर दिया।
कार्यवाही दोबारा शुरू होने के बाद केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सरकार का पक्ष रखा, जिसके बाद विधेयक पर मतदान की प्रक्रिया शुरू हुई।
ध्वनिमत से पारित हुआ विधेयक
मतदान के दौरान विपक्ष की ओर से विरोध के बीच लोकसभा अध्यक्ष ने ध्वनिमत से लोक परीक्षा (संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित घोषित कर दिया। अब यह विधेयक राज्यसभा में पेश किया जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने और राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद यह कानून लागू हो जाएगा।
नए कानून के लागू होने के बाद पेपर लीक, नकल और संगठित परीक्षा घोटालों से जुड़े मामलों में त्वरित जांच, समयबद्ध सुनवाई और सख्त दंड व्यवस्था लागू होगी, जिससे परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता मजबूत करने का सरकार का लक्ष्य है।