नीट प्रदर्शन हिंसा मामला: सुप्रीम कोर्ट ने सात राज्यों को भेजा नोटिस, सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश

नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में हुए छात्र आंदोलन और उसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश समेत सात राज्यों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने सभी घटनास्थलों के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने और जिन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पहले कोई आपराधिक मामला नहीं था, उनके खिलाफ फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी।

नई दिल्ली, 28 जुलाई 2026 (यूएनएस)। नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में हुए छात्र आंदोलन और उसके बाद विभिन्न राज्यों में हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, असम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और केरल सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रदर्शन स्थलों के सभी सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखे जाएं, ताकि जांच के दौरान किसी भी प्रकार का साक्ष्य नष्ट न हो। अदालत ने यह भी कहा कि जिन लोगों के खिलाफ पहले से कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था और केवल प्रदर्शन के दौरान उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है, उनके विरुद्ध फिलहाल कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत से दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई, सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने और भविष्य में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए देशभर में समान दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह छात्रों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन था, जिसमें उन्होंने अपनी मांगें संवैधानिक तरीके से रखीं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे आंदोलनों में कई बार “बिन बुलाए मेहमान” भी शामिल हो जाते हैं, जो अपने अलग एजेंडे के साथ माहौल बिगाड़ने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार महत्वपूर्ण है और अब समय आ गया है कि आंसू गैस जैसे बल प्रयोग के लिए स्पष्ट मानक तय किए जाएं।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकर नारायण ने दावा किया कि एक पुलिस अधिकारी द्वारा सरकारी वाहन के शीशे तोड़ने का वीडियो मौजूद है और पूरे मामले में निष्पक्ष जांच आवश्यक है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिसने भी कानून का उल्लंघन किया है, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और जवाबदेही तय किए बिना जांच का कोई अर्थ नहीं होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि एसआईटी के स्वरूप पर उचित समय पर निर्णय लिया जाएगा।

वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फरासत ने अदालत को बताया कि बिहार में 150 से अधिक नाबालिग अब भी हिरासत में हैं और कई बच्चों को 48 घंटे से अधिक समय तक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए बिना रखा गया। उन्होंने सभी नाबालिगों की तत्काल रिहाई की मांग की।

वहीं, केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान 250 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं और कई को गंभीर चोटें आई हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि सरकार के अनुसार प्रदर्शन में कुछ असामाजिक तत्व भी शामिल हो गए थे। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि छात्रों पर आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग हुआ है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और सरकार स्वतंत्र जांच के पक्ष में है।

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने प्रदर्शन के दौरान भोजन वितरित करने वाले जुनैद मलिक की हिरासत का मुद्दा भी उठाया और उनके परिवार के उत्पीड़न का आरोप लगाया। मामले को गंभीर मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई 3 अगस्त को निर्धारित की है।

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