NDA ने उतारे सभी 9 उम्मीदवार, पवन सिंह से लेकर निशांत कुमार ने दाखिल किया नामांकन

पटना, 08 जून 2026 (यूएनएस)। बिहार विधान परिषद की नौ सीटों पर होने वाले द्विवार्षिक चुनाव के लिए सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सभी उम्मीदवारों ने सोमवार को नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। नामांकन प्रक्रिया के दौरान भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह, निशांत कुमार और भाजपा नेता संजय मयूख सबसे अधिक चर्चा में रहे।

75 सदस्यीय बिहार विधान परिषद की नौ सीटों पर चुनाव हो रहा है। इनमें से आठ सीटों पर एनडीए समर्थित उम्मीदवार मैदान में हैं। नामांकन के दौरान विधानसभा परिसर में पवन सिंह की एक झलक पाने के लिए समर्थकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

भाजपा ने पवन सिंह को विधान परिषद भेजने का फैसला करते हुए पुराने राजनीतिक मतभेदों को पीछे छोड़ दिया है। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने आसनसोल से भाजपा का टिकट लेने से इनकार कर दिया था और बाद में काराकाट लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि उनके इस कदम से शाहाबाद क्षेत्र में एनडीए को नुकसान हुआ था। बाद में वह भाजपा में वापस लौट आए थे।

जदयू उम्मीदवार निशांत कुमार ने नामांकन के दौरान संजय झा और राजीव रंजन सिंह की मौजूदगी में अपना पर्चा दाखिल किया। हालांकि उनके पिता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस अवसर पर मौजूद नहीं थे।

भाजपा ने पवन सिंह और संजय मयूख के अलावा अनिल ठाकुर तथा शीला पंडित को भी उम्मीदवार बनाया है। वहीं जदयू ने निशांत कुमार के साथ भारती मेहता और शिवरानी देवी प्रजापति को मैदान में उतारा है।

इसके अलावा जदयू के ललन प्रसाद ने एक रिक्त सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया। वहीं लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की ओर से अशरफ अंसारी ने पर्चा भरा।

इस दौरान सम्राट चौधरी और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान भी विधानसभा सचिवालय पहुंचे। एलजेपी (रामविलास) के संसदीय बोर्ड अध्यक्ष अरुण भारती ने कहा कि पार्टी सामाजिक समरसता और समावेशी राजनीति की विचारधारा पर आगे बढ़ रही है।

वहीं मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल ने विधान परिषद की एक सीट के लिए लगातार तीसरे कार्यकाल हेतु सुनील कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया है।

नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 11 जून निर्धारित की गई है, जबकि मतदान 18 जून को होगा। चुनाव परिणामों पर सभी दलों की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसे आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक ताकत के प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है।

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