सीबीएसई मूल्यांकन गड़बड़ी मामले में दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और बोर्ड को जारी किया नोटिस

नई दिल्ली, 08 जून 2026 (यूएनएस)। दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की कक्षा 12वीं परीक्षा के डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में कथित गड़बड़ियों को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 12 जून 2026 को निर्धारित की गई है।

यह आदेश नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कक्षा 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में इस्तेमाल किए गए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सिस्टम में तकनीकी खामियों और प्रक्रियागत गड़बड़ियों के कारण हजारों विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

याचिका के अनुसार कई छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं सिस्टम में गायब दिखाई गईं, कुछ स्कैन कॉपियां धुंधली थीं, जबकि कुछ मामलों में उत्तर पुस्तिकाओं के गलत मूल्यांकन की शिकायतें सामने आई हैं। एनएसयूआई का आरोप है कि इन खामियों का सीधा असर छात्रों के परिणाम और भविष्य पर पड़ सकता है।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया में हुई कथित गड़बड़ियों की किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी समस्याओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, तकनीकी प्रोटोकॉल और स्पष्ट दिशानिर्देश तैयार किए जाएं।

याचिका में यह भी मांग की गई है कि जिन छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं तकनीकी गड़बड़ियों से प्रभावित हुई हैं, उन्हें उपयुक्त कंपेन्सेटरी मार्क्स दिए जाएं ताकि उनके शैक्षणिक हित प्रभावित न हों।

एनएसयूआई ने दावा किया है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में बार-बार सामने आ रही समस्याओं के कारण छात्रों और अभिभावकों में चिंता बढ़ी है। संगठन का कहना है कि अंक निर्धारण में असंगतियां, उत्तर पुस्तिकाओं का लापता होना और गलत मूल्यांकन जैसी शिकायतों को पर्याप्त गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल तकनीक का उपयोग बढ़ना सकारात्मक कदम है, लेकिन इसके साथ मजबूत डेटा सुरक्षा, बैकअप व्यवस्था और प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र का होना भी आवश्यक है। एनएसयूआई ने अदालत से सीबीएसई को एक सुदृढ़ और त्वरित शिकायत समाधान प्रणाली विकसित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया है।

अब इस मामले में केंद्र सरकार और सीबीएसई के जवाब तथा आगामी सुनवाई पर छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा जगत की नजरें टिकी हुई हैं।

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