नई दिल्ली, 02 जुलाई। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में किसी उच्च स्तरीय स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास से जुड़ा है, इसलिए इसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच आवश्यक है।
वेणुगोपाल ने अपने पत्र में दावा किया कि प्रारंभिक जांच से किसी संगठित गिरोह के सक्रिय होने और कई स्तरों पर संस्थागत विफलताओं के संकेत मिले हैं। उनका आरोप है कि इस प्रकार की कथित वित्तीय अनियमितताएं संस्थागत संरक्षण के बिना संभव नहीं हो सकती थीं।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि नकदी गिनने वाले कर्मचारियों ने निगरानी व्यवस्था को दरकिनार कर नकदी और बहुमूल्य आभूषणों की कथित चोरी की। उन्होंने यह भी दावा किया कि मामले से जुड़े सबूत मिटाने के लिए कई महीनों की सीसीटीवी फुटेज नष्ट कर दी गई तथा शिकायतों को या तो नजरअंदाज किया गया या दबा दिया गया।
पत्र में वेणुगोपाल ने कहा कि ट्रस्ट के पूर्व मुख्य लेखा अधिकारी द्वारा कथित अनियमितताओं को लेकर दी गई चेतावनियों और भारतीय स्टेट बैंक द्वारा कथित रूप से उठाए गए सवालों की भी अनदेखी की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) और उसके बाद दर्ज की गई एफआईआर केवल औपचारिक कार्रवाई तक सीमित है।
उनका कहना है कि अब तक केवल निचले स्तर के कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई हुई है, जबकि कथित तौर पर पूरे मामले को संरक्षण देने वाले जिम्मेदार लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
वेणुगोपाल ने पत्र में कहा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, जिसकी स्थापना वर्ष 2020 में केंद्र सरकार द्वारा की गई थी, एक सार्वजनिक ट्रस्ट है। ऐसे में उससे पारदर्शिता और जवाबदेही के सर्वोच्च मानकों का पालन अपेक्षित है। उन्होंने कहा कि यदि लगाए गए आरोप सही हैं, तो यह न केवल वित्तीय अनियमितता का मामला है, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था और भगवान श्रीराम के नाम पर स्थापित संस्था की पवित्रता के साथ भी गंभीर विश्वासघात है।
