लखनऊ, 02 जुलाई। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) के कार्यकारी अध्यक्ष एवं उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ तथा उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष एवं इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने वंचित एवं विस्थापित समुदायों को न्याय और सरकारी योजनाओं से जोड़ने के उद्देश्य से एक विशेष अभियान की शुरुआत की है। इस ऐतिहासिक पहल का शुभारंभ बिजनौर जिले से किया गया।
इस अभियान का उद्देश्य प्रदेश में रहने वाले विस्थापित, अनुसूचित जनजाति, वनवासी तथा अन्य विशेष श्रेणी के उन समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ना है, जो वर्षों से वन विभाग और प्रशासन के साथ आजीविका एवं अधिकारों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।
इसी क्रम में 1 जुलाई को बिजनौर के ग्राम नवलपुर बैराज स्थित समग्र विद्यालय में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सहयोग से विस्थापित मछुआरा समुदाय के लिए विधिक सहायता एवं सशक्तीकरण शिविर आयोजित किया गया। शिविर का मुख्य उद्देश्य प्रशासन और विस्थापित समुदाय के बीच की दूरी कम करना, लोगों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाना था।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव डॉ. मनु कालिया, जनपद न्यायाधीश संजय कुमार, जिलाधिकारी जसजीत कौर, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव स्वाती चंद्रा, पुलिस अधीक्षक डॉ. के.जी. सिंह, मुख्य विकास अधिकारी रणविजय सिंह, प्रभागीय वनाधिकारी जयसिंह कुशवाहा, एसडीएम रितु रानी, पीडी (डीआरडीए) आलोक वर्मा सहित अनेक प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लिया। अधिकारियों ने उपस्थित लोगों को उनके संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों के साथ-साथ विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी।
शिविर के दौरान एक विशेष लोक अदालत का भी आयोजन किया गया, जिसमें आपसी सुलह-समझौते के आधार पर 20 मामलों का निस्तारण किया गया।
प्राधिकरण ने निर्देश दिए हैं कि शिविर में चिन्हित लाभार्थियों का 15 दिनों के भीतर संबंधित विभागों द्वारा पंजीकरण सुनिश्चित कर उन्हें राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाए। इसकी विस्तृत रिपोर्ट जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजी जाएगी।
शिविर के दौरान नागरिकों ने अपनी समस्याएं प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष रखीं, जिनके समाधान का आश्वासन दिया गया। साथ ही घासीवाला, हेमराज, चांदपुरा और धर्मनगरी सहित अन्य विस्थापित बस्तियों में भी ऐसे ही विधिक सहायता एवं सशक्तीकरण शिविर आयोजित करने का प्रस्ताव रखा गया।
इस अवसर पर एक मेडिकल कैंप भी लगाया गया, जिसमें 42 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें चिकित्सकीय परामर्श एवं आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई गईं। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने इसे एक मॉडल पहल बताते हुए भविष्य में प्रदेश के अन्य जिलों में भी वंचित एवं अधिकारों से वंचित समुदायों के लिए इसी प्रकार के विशेष शिविर आयोजित करने की योजना बनाई है।
