सोने के आयात पर कड़ी नजर, अभी चिंता की स्थिति नहीं: सीतारमण

नई दिल्ली, 23 फरवरी। निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों की भारी खरीद के कारण सोने की कीमतों में तेजी आई है, लेकिन भारत में सोने के आयात की स्थिति अभी चिंताजनक स्तर पर नहीं पहुंची है। उन्होंने बताया कि सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक सोने के आयात पर कड़ी नजर रखे हुए हैं।

वित्त मंत्री ने आरबीआई के केंद्रीय निदेशक मंडल की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि भारत पारंपरिक रूप से सोने का शुद्ध आयातक रहा है और घरेलू निवेशकों के लिए सोना संपत्ति और आभूषण दोनों रूपों में पसंदीदा निवेश विकल्प बना हुआ है। उन्होंने कहा कि त्योहारों के मौसम और विशेष अवसरों के दौरान सोने की मांग में स्वाभाविक रूप से वृद्धि होती है।

आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान भारत का सोना आयात मूल्य के लिहाज से बढ़कर लगभग 50 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब एक अरब डॉलर अधिक है। हालांकि जनवरी में सोने के आयात की मात्रा और मूल्य दोनों में अचानक वृद्धि दर्ज की गई, जिसकी समीक्षा केंद्रीय बैंक कर रहा है।

संजय मल्होत्रा, आरबीआई गवर्नर ने कहा कि अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान कीमतों में वृद्धि को आयातित मात्रा में कमी ने काफी हद तक संतुलित कर दिया था, जबकि जनवरी में दोनों में उछाल देखा गया है। उन्होंने कहा कि मांग में मौसमी उतार-चढ़ाव सामान्य है और केंद्रीय बैंक इस स्थिति का विश्लेषण कर रहा है।

मल्होत्रा ने कहा कि भारत का बाह्य क्षेत्र मजबूत बना हुआ है और चालू खाते का घाटा सकल घरेलू उत्पाद के लगभग एक प्रतिशत के दायरे में है, जो प्रबंधनीय माना जाता है। उन्होंने कहा कि आरबीआई इस स्थिति को लेकर अनावश्यक रूप से चिंतित नहीं है।

इससे पहले वित्त मंत्री ने आरबीआई के केंद्रीय निदेशक मंडल की 621वीं बैठक को संबोधित किया, जिसमें वैश्विक आर्थिक परिदृश्य, भू-राजनीतिक परिस्थितियों और वित्तीय बाजारों की अस्थिरता पर चर्चा की गई। बैठक में केंद्रीय बजट 2026-27 की रणनीतिक प्राथमिकताओं पर भी विचार-विमर्श हुआ।

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