14 से 16 जून तक प्रदेशभर में लगेगा कृषि एवं आरोग्य मेला, किसानों को प्राकृतिक खेती और वृक्षारोपण के लिए किया जाएगा प्रेरित

लखनऊ, 05 जून (यूएनएस)। प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा है कि किसानों की आय बढ़ाने, टिकाऊ कृषि को प्रोत्साहित करने तथा बदलती जलवायु की चुनौतियों से निपटने के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में आगामी 14 से 16 जून तक प्रदेश के सभी जनपदों में कृषि मेला एवं आरोग्य मेला आयोजित किया जाएगा, जबकि 17 और 18 जून को प्राकृतिक खेती विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।

शुक्रवार को लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास पर विभागीय अधिकारियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक में कृषि मंत्री ने विभिन्न किसान हितैषी कार्यक्रमों की तैयारियों की समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रसायन मुक्त खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक किया जाएगा तथा उन्हें आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल कृषि तकनीकों की जानकारी दी जाएगी।

कृषि मंत्री ने बताया कि 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रदेश के सभी राजकीय कृषि प्रक्षेत्रों और कृषि विभाग के कार्यालयों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा एक जून से 30 जून तक प्रदेश के सभी राजकीय कृषि प्रक्षेत्रों पर “खेत बचाओ अभियान” चलाया जा रहा है, जिसके माध्यम से किसानों को भूमि संरक्षण और उन्नत कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

बैठक में उन्होंने गन्ना किसानों की आय बढ़ाने के लिए गन्ना आधारित सहफसली खेती को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया। इसके तहत गन्ने के साथ मूंगफली, उड़द, मूंग, लोबिया, सरसों और भिंडी जैसी फसलों की खेती के प्रदर्शन प्लाट विकसित किए गए हैं। साथ ही भूमि की उर्वरता बढ़ाने के लिए ढैंचा की विभिन्न प्रजातियों का प्रदर्शन भी कराया जा रहा है।

सूर्य प्रताप शाही ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कृषि शिक्षा से संबंधित उप-मॉड्यूल शीघ्र तैयार कर मुख्यालय को उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कृषि यंत्रों की बुकिंग प्रक्रिया पुनः शुरू करने तथा धान बीज वितरण कार्य में लगे कर्मचारियों के मानदेय का भुगतान शीघ्र सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

कृषि मंत्री ने बताया कि इस वर्ष प्रदेश में उड़द, मूंग, सोयाबीन और तिल जैसी दलहन एवं तिलहन फसलों के क्षेत्रफल में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने संभावित “सुपर एल-नीनो” की स्थिति को देखते हुए किसानों से अपील की कि वे अपने खेतों की मेड़ों पर अधिक से अधिक वृक्षारोपण करें तथा मेड़ों पर अरहर की खेती अपनाएं, जिससे जल संरक्षण के साथ अतिरिक्त आय भी प्राप्त हो सके।

उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा बैंगन, मक्का, लोबिया और लौकी जैसी सब्जी फसलों की खेती को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि किसानों को विविधीकृत कृषि प्रणाली के माध्यम से अधिक लाभ मिल सके।

बैठक में कृषि विभाग के प्रमुख सचिव रविन्द्र, सचिव इन्द्र विक्रम सिंह, कृषि निदेशक पंकज त्रिपाठी, उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम के निदेशक टी.एम. त्रिपाठी तथा उत्तर प्रदेश बीज प्रमाणीकरण संस्था के निदेशक टी.पी. चौधरी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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