उन्नाव/लखनऊ। उन्नाव जनपद की तहसील हसनगंज क्षेत्र के परौरा गांव में कथित तौर पर DRDO परमिशन की आड़ में बड़े पैमाने पर मिट्टी खनन किए जाने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि खनन माफिया उन्नाव और लखनऊ जनपद की प्रशासनिक सीमाओं का फायदा उठाकर भारी मात्रा में मिट्टी का परिवहन कर रहे हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक परौरा क्षेत्र से निकाली जा रही मिट्टी को लखनऊ के कटी बगिया–हरौनी रोड स्थित निजी स्थानों और वेयरहाउसों में डंप किया जा रहा है। आरोप है कि जिस अनुमति का उपयोग किसी विशेष सरकारी अथवा निर्धारित कार्य के लिए होना चाहिए, उसी की आड़ में मिट्टी निजी परियोजनाओं तक पहुंचाई जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार चल रहे भारी वाहनों से ग्रामीण सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं और क्षेत्र में धूल तथा यातायात की समस्या बढ़ गई है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि खनन और परिवहन के दौरान नियमों की अनदेखी की जा रही है तथा संबंधित विभागों की निगरानी प्रभावी नजर नहीं आ रही।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि अनुमति वास्तव में किसी सरकारी कार्य के लिए जारी हुई है, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि मिट्टी कहां से निकाली जा रही है, कितनी मात्रा में परिवहन की अनुमति है और उसे किन स्थानों पर डंप किया जाना निर्धारित है। लोगों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
स्थानीय नागरिकों और किसानों ने मांग की है कि संबंधित परमिशन, रॉयल्टी, परिवहन मार्ग, वाहन विवरण और मिट्टी डंपिंग स्थलों की जांच कराई जाए। साथ ही यदि जांच में अवैध खनन या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
