राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर संत समाज का शक्ति प्रदर्शन; बोले- जांच पूरी होने तक राजनीति बंद हो

अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर देशभर में जारी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच अयोध्या का संत समाज अब खुलकर मैदान में उतर आया है। गुरुवार को मणिराम दास छावनी में आयोजित संत मंडल की विशेष बैठक में दो स्पष्ट संदेश दिए गए—पहला, विशेष जांच दल (एसआईटी) की अंतिम रिपोर्ट आने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जाना चाहिए और दूसरा, यदि पूर्व महासचिव चंपत राय जांच में निर्दोष साबित होते हैं तो उन्हें सम्मानपूर्वक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में दोबारा जिम्मेदारी सौंपी जानी चाहिए।

बैठक ऐसे समय हुई है जब राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में आगे बढ़ रही है। हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने जांच प्रक्रिया को और मजबूत करने के निर्देश दिए हैं तथा विशेष जांच दल के कामकाज की निगरानी का फैसला किया है। साथ ही जांच पूरी होने तक पूरे मामले के राजनीतिकरण से बचने की भी टिप्पणी की है।

संतों ने कहा- पूरे ट्रस्ट को कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं

बैठक की अध्यक्षता मणिराम दास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास ने की। उन्होंने कहा कि कुछ लोग इस प्रकरण को आधार बनाकर राम मंदिर, सनातन धर्म और संत समाज की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति ने अपराध किया है तो उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन पूरे ट्रस्ट और संत समाज को बदनाम करना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसे प्रयासों का सामाजिक स्तर पर विरोध किया जाएगा तथा संत समाज श्रद्धालुओं तक प्रमाणिक जानकारी पहुंचाने का अभियान भी चलाएगा।

चंपत राय के समर्थन में एकजुट दिखा संत समाज

बैठक में महंत जयराम दास, अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता महंत संजय दास तथा अन्य संतों ने कहा कि चंपत राय ने राम मंदिर आंदोलन और मंदिर निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका कहना था कि यदि एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट में उनके खिलाफ आरोप सिद्ध नहीं होते हैं तो उन्हें ट्रस्ट में पुनः सम्मानजनक जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।

विश्व हिंदू परिषद के महामंत्री बजरंग लाल बागड़ा ने भी कहा कि दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई जारी है, लेकिन निर्दोष लोगों को न्याय मिलना चाहिए। उन्होंने एसआईटी की जांच पर विश्वास जताते हुए कहा कि सत्य सामने आने के बाद स्थिति स्वतः स्पष्ट हो जाएगी।

जांच अभी जारी, एसआईटी ने मांगा अतिरिक्त समय

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल ने हाल ही में अपनी जांच पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है। जांच एजेंसियों का कहना है कि वित्तीय लेनदेन, दान प्रबंधन और संबंधित दस्तावेजों की विस्तृत जांच की जा रही है, इसलिए जांच को अंतिम रूप देने में अतिरिक्त समय की आवश्यकता है।

इससे पहले श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए गए थे तथा कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। ट्रस्ट ने तब कहा था कि जांच पूरी होने तक प्रशासनिक व्यवस्था सुचारु रूप से चलती रहेगी।

विपक्ष के आरोपों का भी हुआ जवाब

बैठक में संतों ने कांग्रेस सहित विपक्षी दलों द्वारा उठाए जा रहे सवालों का भी अप्रत्यक्ष जवाब दिया। हाल के दिनों में विपक्ष ने प्रधानमंत्री से इस मामले में जवाब मांगते हुए जांच की पारदर्शिता पर सवाल उठाए थे। दूसरी ओर संत समाज का कहना है कि राजनीतिक दलों को जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी घोषित करने से बचना चाहिए।

हर महीने होगी संतों की बैठक

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि अब प्रत्येक माह दो बार संत समाज की बैठक आयोजित की जाएगी। इन बैठकों में राम मंदिर, सनातन धर्म, सामाजिक विषयों और धार्मिक गतिविधियों पर चर्चा होगी। संत अपने-अपने मठों, मंदिरों और आश्रमों के माध्यम से श्रद्धालुओं को प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराएंगे ताकि अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं को रोका जा सके।

आगे क्या?

अब इस पूरे विवाद की दिशा काफी हद तक एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट और सर्वोच्च न्यायालय की अगली सुनवाई पर निर्भर करेगी। जांच एजेंसियां अभी भी वित्तीय रिकॉर्ड, दान प्रबंधन व्यवस्था और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। दूसरी ओर संत समाज ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह जांच पूरी होने तक चंपत राय के समर्थन में खड़ा रहेगा और राम मंदिर को लेकर किसी भी प्रकार के राजनीतिक या धार्मिक दुष्प्रचार का विरोध करेगा।

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