उत्तर प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों से सशक्त हो रहीं महिलाएं, नीतू कुंडू बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एसआरएलएम) से जुड़कर गाजियाबाद की नीतू कुंडू ने अचार और मुरब्बा निर्माण का सफल उद्यम खड़ा किया। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल करने वाली नीतू आज अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं।

लखनऊ, 23 जुलाई 2026। उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के लिए स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से व्यापक अभियान चला रही है। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत लाखों महिलाएं स्वरोजगार से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रही हैं।

गाजियाबाद जिले के ग्राम मोहम्मदपुर धैदा की रहने वाली नीतू कुंडू इसकी प्रेरणादायक मिसाल हैं। वह पार्वती महिला ग्राम संगठन और महिला शक्ति क्लस्टर धैदा से जुड़ी हैं। वर्ष 2021 में उन्होंने राधिका स्वयं सहायता समूह की सदस्यता ली। उस समय उनका परिवार आर्थिक कठिनाइयों से गुजर रहा था, लेकिन समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने बचत, वित्तीय प्रबंधन और स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाया।

कृषि विज्ञान केंद्र और जिला प्रशासन द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में नीतू कुंडू ने अचार और मुरब्बा बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने घर से ही अचार और मुरब्बा तैयार करने का व्यवसाय शुरू किया। गुणवत्ता और स्वाद के कारण उनके उत्पादों की मांग लगातार बढ़ती गई और आज उनका यह छोटा प्रयास सफल उद्यम में बदल चुका है। इससे उनकी मासिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।

नीतू कुंडू अब अपने क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनका कहना है कि यदि इच्छाशक्ति और सरकारी सहयोग साथ हो तो कोई भी महिला अपनी परिस्थितियां बदल सकती है।

प्रदेश सरकार का कहना है कि स्वयं सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा, रोजगार और सामाजिक सम्मान दिलाने का प्रभावी माध्यम बन रहे हैं। बैंकिंग संवाददाता सखी योजना के माध्यम से महिलाएं गांव-गांव वित्तीय सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं, जबकि सार्वजनिक वितरण प्रणाली की उचित दर की दुकानों के संचालन की जिम्मेदारी भी महिला समूहों को दी जा रही है।

आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए टेक होम राशन के निर्माण और आपूर्ति का कार्य भी स्वयं सहायता समूहों को सौंपा जा रहा है। इसके अलावा एक जनपद एक उत्पाद योजना के माध्यम से महिला समूहों को स्थानीय उत्पादों के निर्माण और विपणन से जोड़कर बड़े बाजार उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

सरकार का दावा है कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं की आय बढ़ने के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छता के प्रति जागरूकता भी बढ़ी है। पंचायतों और ग्राम विकास योजनाओं में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से ग्रामीण विकास को नई गति मिली है।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित इन पहलों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तिकरण और गरीबी उन्मूलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और ग्रामीण विकास को नई दिशा देना है।

Share this newsWhatsAppFacebookX

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *