प्रधानमंत्री की अपील- एक साल तक न खरीदें सोना, पेट्रोल-डीजल बचाएं; विदेशी मुद्रा संरक्षण पर जोर

नई दिल्ली/हैदराबाद। वैश्विक ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से विदेशी मुद्रा बचाने के लिए बड़ी अपील की है। प्रधानमंत्री ने लोगों से अगले एक साल तक सोना न खरीदने, विदेश यात्राओं को सीमित रखने और पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में देश को आर्थिक रूप से मजबूत बनाए रखने के लिए यह कदम बेहद जरूरी हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, विशेष रूप से कच्चा तेल और सोना। ऐसे में अनावश्यक खर्च और अधिक खपत का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ता है। उन्होंने लोगों से सार्वजनिक परिवहन का अधिक इस्तेमाल करने और ईंधन की बचत करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि कोविड काल के दौरान देश ने कई वैकल्पिक व्यवस्थाएं विकसित की थीं और अब समय आ गया है कि उन व्यवस्थाओं पर फिर से गंभीरता से विचार किया जाए। प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद यह चर्चा भी तेज हो गई है कि आने वाले समय में कई क्षेत्रों में फिर से ‘वर्क फ्रॉम होम’ संस्कृति को बढ़ावा मिल सकता है, ताकि ईंधन की खपत कम हो सके।

सोना खरीदने पर रोक जैसी अपील से व्यापारी चिंतित

प्रधानमंत्री की अपील का असर सर्राफा कारोबार पर भी दिखाई देने लगा है। सोना व्यापारियों में इसको लेकर चिंता और मायूसी का माहौल है। भारत दुनिया में चीन के बाद सोने की सबसे ज्यादा खपत करने वाला दूसरा देश है। देश में हर साल लगभग 700 से 800 टन सोने की मांग रहती है, जिसमें करीब 90 प्रतिशत सोना विदेशों से आयात किया जाता है।

भारत मुख्य रूप से स्विट्जरलैंड, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात से सोने का आयात करता है। घरेलू स्तर पर कर्नाटक की हुट्टी गोल्ड माइंस समेत कुछ सीमित खदानों से ही उत्पादन होता है। ऐसे में सरकार की कोशिश विदेशी मुद्रा पर दबाव कम करने की बताई जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक सरकार आने वाले समय में सोने पर आयात शुल्क बढ़ाने पर भी विचार कर सकती है। यदि ऐसा होता है तो घरेलू बाजार में सोना और महंगा हो सकता है।

पेट्रोल-डीजल की बचत पर जोर

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है। यदि लोग बिना जरूरत पेट्रोल, डीजल और गैस का अत्यधिक उपयोग करेंगे, तो इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय गंभीर ऊर्जा संकट से गुजर रही है और पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने हालात और चुनौतीपूर्ण बना दिए हैं। इसलिए हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह पेट्रोलियम उत्पादों का सोच-समझकर इस्तेमाल करे।

प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि यदि देशवासी ईंधन की बचत करेंगे और विदेशी वस्तुओं पर अनावश्यक खर्च कम करेंगे, तो भारत वैश्विक संकट के असर को काफी हद तक नियंत्रित कर सकेगा और आर्थिक रूप से मजबूत बना रहेगा।

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