समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सात सूत्रीय अपील को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि चुनाव खत्म होते ही सरकार को “संकट” याद आ गया, जबकि देश के लिए सबसे बड़ा संकट खुद भाजपा है।
दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को सिकंदराबाद में आयोजित एक जनसभा के दौरान देशवासियों से सात प्रमुख अपीलें की थीं। इनमें वर्क फ्रॉम होम को प्राथमिकता देने, पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, एक साल तक विदेश यात्रा से बचने, स्वदेशी उत्पादों को अपनाने, खाने के तेल का सीमित इस्तेमाल करने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और सोने की खरीदारी कम करने जैसी बातें शामिल थीं।
इन अपीलों पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लंबा बयान जारी किया। उन्होंने लिखा, “चुनाव खत्म होते ही ‘संकट’ याद आ गया। दरअसल देश के लिए संकट सिर्फ एक है और उसका नाम भाजपा है।”
सपा प्रमुख ने सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर जनता से लगातार बचत और खर्च कम करने की अपील की जा रही है, तो फिर “पंच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था” का सपना कैसे पूरा होगा। उन्होंने दावा किया कि डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है जबकि भारतीय रुपया कमजोर पड़ता जा रहा है।
अखिलेश यादव ने सोने की खरीद सीमित करने की अपील पर भी तंज कसते हुए कहा कि यह सलाह आम जनता को नहीं बल्कि “भाजपाइयों के भ्रष्ट लोगों” को दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा, “जनता तो वैसे भी डेढ़ लाख तोले का सोना नहीं खरीद पा रही है। भाजपाई ही अपनी काली कमाई का स्वर्णीकरण करने में लगे हैं।”
उन्होंने भाजपा पर चुनावों के दौरान बड़े पैमाने पर खर्च करने का आरोप भी लगाया। अखिलेश ने सवाल किया कि यदि सरकार अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, वर्क फ्रॉम होम और ईंधन बचत की सलाह दे रही है, तो चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा नेताओं ने खुद इन उपायों को क्यों नहीं अपनाया।
सपा अध्यक्ष ने दावा किया कि सरकार की ऐसी अपीलों से बाजार में मंदी, महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता का माहौल बनेगा। उन्होंने कहा कि सरकार का काम लोगों को संकट से बाहर निकालना होता है, न कि “भय और अफरातफरी” फैलाना।
विदेश नीति को लेकर भी उन्होंने केंद्र सरकार को घेरा। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भारत अपनी पारंपरिक गुटनिरपेक्ष नीति से हट गया है, जिसकी वजह से देश को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, “सच तो यह है कि भाजपा विदेश नीति और गृह नीति दोनों में फेल हो गई है। यह अपील भाजपा सरकार की अपनी असफलता की स्वीकारोक्ति है।”
