पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को जमीन ट्रांसफर करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विभागीय स्तर पर जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी गई है और अगले 45 दिनों के भीतर इसे केंद्रीय गृह मंत्रालय को सौंप दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि सीमा पर बाड़बंदी पूरी होने के बाद अवैध घुसपैठ की समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा। उन्होंने कहा, “आज हमारी पहली कैबिनेट बैठक में हमने बीएसएफ को जमीन ट्रांसफर करने का फैसला लिया है। प्रक्रिया आज से शुरू हो गई है। जमीन हस्तांतरण पूरा होते ही बीएसएफ सीमा पर बाड़ लगाने का काम तेजी से पूरा करेगी।”
नई सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री ने सभी मतदाताओं, चुनाव आयोग, केंद्रीय सुरक्षा बलों, पुलिस, पर्यवेक्षकों और राजनीतिक दलों का आभार भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सफल बनाने में सभी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
शुभेंदु अधिकारी ने चुनावी हिंसा के दौरान जान गंवाने वाले लोगों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संघर्ष के दौरान जिन 321 लोगों की मौत हुई, यदि उनके परिवार चाहेंगे तो सरकार मामले की जांच शुरू करेगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि पश्चिम बंगाल में केंद्र सरकार की कई प्रमुख योजनाओं को लागू किया जाएगा। इनमें आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, प्रधानमंत्री किसान बीमा योजना, पीएम श्री योजना, विश्वकर्मा योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और उज्ज्वला योजना जैसी योजनाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अब केंद्र की जनकल्याणकारी योजनाओं के साथ सक्रिय रूप से जुड़कर काम करेगी।
प्रशासनिक सुधारों को लेकर भी सरकार ने कई अहम फैसले किए हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारियों को केंद्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जोड़ा जाएगा। साथ ही राज्य की न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्था को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के अनुरूप ढालने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
युवाओं को राहत देते हुए राज्य सरकार ने सरकारी नौकरियों के लिए अधिकतम आयु सीमा में पांच साल की बढ़ोतरी करने का फैसला भी लिया है। इसके अलावा केंद्र सरकार की जनगणना संबंधी अधिसूचना को तत्काल प्रभाव से लागू करने की घोषणा की गई है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने इस प्रक्रिया को रोक रखा था।
नई सरकार के इन फैसलों को पश्चिम बंगाल में प्रशासनिक और राजनीतिक बदलाव के बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
