मुरादाबाद, 26 जुलाई 2026। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच सियासी हलचल तेज हो गई है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव को सार्वजनिक मंच से गठबंधन का प्रस्ताव देते हुए कहा कि उनकी पार्टी भाजपा को दोबारा सत्ता में आने से रोकने के लिए साथ लड़ने को तैयार है।
मुरादाबाद में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा, “मजलिस नहीं चाहती कि उत्तर प्रदेश में भाजपा फिर सरकार बनाए। मैं हाथ मिलाने को तैयार हूं, गठबंधन करने को तैयार हूं। आज बात कर लो, चुनाव खत्म होने के बाद रोना मत। अगर आपको लगता है कि ओवैसी चुनाव लड़ता है तो आपका नुकसान होता है, तो आइए साथ मिलकर चुनाव लड़ते हैं।”
उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई किसी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि अधिकार और न्याय की है। ओवैसी ने मुस्लिम नेतृत्व और राजनीतिक भागीदारी पर जोर देते हुए कहा कि अब बराबरी की हिस्सेदारी का समय है और समुदाय को केवल समर्थन देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
ओवैसी ने अपने बिहार के अनुभव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) को भी गठबंधन का प्रस्ताव दिया था, लेकिन गठबंधन नहीं हुआ। इसके बाद AIMIM ने अकेले चुनाव लड़ते हुए सीमांचल क्षेत्र में पांच सीटों पर जीत दर्ज की थी।
पिछले कुछ समय से ओवैसी पश्चिमी उत्तर प्रदेश और रोहिलखंड क्षेत्र में लगातार जनसभाएं कर रहे हैं। उनका कहना है कि उनकी पार्टी को विपक्ष द्वारा “वोट काटने वाली पार्टी” कहे जाने का जवाब देने के लिए ही उन्होंने सपा के सामने गठबंधन का खुला प्रस्ताव रखा है।
ओवैसी के बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इसे तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति करार देते हुए कहा कि यह “भाईजान कोलैबोरेशन” की कोशिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष केवल वोटों के ध्रुवीकरण की राजनीति कर रहा है।
हालांकि, समाजवादी पार्टी की ओर से ओवैसी के गठबंधन प्रस्ताव पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर अब इस बात पर है कि 2027 के चुनाव से पहले विपक्षी दलों के बीच इस प्रस्ताव को लेकर क्या रुख अपनाया जाता है।