नई दिल्ली/गुवाहाटी। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को बड़ा झटका देते हुए गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। इस फैसले के बाद कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेता के समर्थन में खुलकर आवाज उठाई है और इसे “उत्पीड़न की राजनीति” करार दिया है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पूरी पार्टी अपने मीडिया और प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने भरोसा जताया कि न्यायपालिका पर उन्हें पूरा विश्वास है और अंततः न्याय की ही जीत होगी। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने के लिए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
यह मामला हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां शर्मा से जुड़े आरोपों से संबंधित है। रिंकी शर्मा ने पवन खेड़ा और अन्य लोगों के खिलाफ कई पासपोर्ट और विदेशों में अघोषित संपत्तियों के आरोपों को लेकर असम पुलिस की अपराध शाखा में शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया।
गौरतलब है कि इससे पहले तेलंगाना उच्च न्यायालय ने पवन खेड़ा को सात दिन की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी, जिससे उन्हें अस्थायी राहत मिली थी। हालांकि, असम पुलिस ने इस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर रोक लगा दी और खेड़ा को गुवाहाटी उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने का निर्देश दिया।
हाई कोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद अब खेड़ा की कानूनी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में पहुंचने जा रही है। राजनीतिक हलकों में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर बहस तेज हो गई है, जहां कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है, वहीं भाजपा इसे कानून के तहत कार्रवाई करार दे रही है।
अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी है, जहां यह तय होगा कि पवन खेड़ा को राहत मिलती है या नहीं।
