नासा की बड़ी उपलब्धि: अंतरिक्ष में ही बनेगा आईवी फ्लूइड, लंबे मिशनों को मिलेगा सहारा

नई दिल्ली। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशनों के लिए एक अहम तकनीकी सफलता हासिल की है। अब अंतरिक्ष में ही जरूरत के अनुसार इंट्रावेनस (आईवी) फ्लूइड तैयार किया जा सकेगा। यह नई तकनीक खासतौर पर चंद्रमा और मंगल जैसे लंबी अवधि के मिशनों में अंतरिक्ष यात्रियों के स्वास्थ्य के लिए बेहद उपयोगी मानी जा रही है।

अब तक हर मिशन में आईवी फ्लूइड पृथ्वी से तैयार रूप में ले जाना पड़ता था। यह द्रव—जिसमें मुख्य रूप से सोडियम क्लोराइड और शुद्ध पानी होता है—निर्जलीकरण, जलन और कई अन्य चिकित्सीय स्थितियों के उपचार में काम आता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह लगभग 30 प्रतिशत सामान्य चिकित्सा समस्याओं के इलाज में सहायक होता है।

हालांकि, पहले से पैक किए गए आईवी फ्लूइड की सबसे बड़ी समस्या इसकी सीमित शेल्फ लाइफ है, जो लगभग 16 महीने तक ही रहती है। जबकि गहरे अंतरिक्ष मिशन, खासकर मंगल यात्रा, तीन साल या उससे अधिक समय तक चल सकते हैं। ऐसे में पर्याप्त मात्रा में आईवी फ्लूइड का भंडारण करना चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरा होता है।

इसी समस्या के समाधान के लिए नासा ग्लेन रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिकों ने एक उन्नत प्रणाली विकसित की है, जिसे आईवीजीईएन मिनी (IVGEN Mini) नाम दिया गया है। यह सिस्टम अंतरिक्ष में उपलब्ध पीने के पानी को शुद्ध कर उसे चिकित्सा-योग्य आईवी द्रव में बदल सकता है।

इस तकनीक का परीक्षण अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर किया जा रहा है। आईवीजीईएन मिनी को नॉर्थरोप ग्रुम्मन के कमर्शियल रिसप्लाई मिशन के जरिए 11 अप्रैल को स्टेशन पर भेजा गया।

कैसे काम करता है सिस्टम?
यह प्रणाली अंतरिक्ष स्टेशन के पीने के पानी को एक बैग में भरती है और उसे फिल्टर करके उसमें मौजूद कणों और खनिजों को पूरी तरह हटा देती है। इसके बाद शुद्ध पानी को एक दूसरे बैग में भेजा जाता है, जिसमें पहले से निर्धारित मात्रा में सोडियम क्लोराइड मौजूद होता है। दोनों के सटीक मिश्रण से रोगाणु रहित और सुरक्षित आईवी फ्लूइड तैयार हो जाता है।

नासा की इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट मैनेजर कर्टनी कुरको के अनुसार, इस सिस्टम का संचालन मई में परीक्षण के तौर पर किया जाएगा। अंतरिक्ष स्टेशन पर मौजूद दल दो दिनों में लगभग 10 लीटर आईवी द्रव तैयार करेगा, जिसे बाद में पृथ्वी पर लाकर उसकी गुणवत्ता की जांच की जाएगी।

पुराने सिस्टम से बेहतर
आईवीजीईएन मिनी, 2010 में विकसित मूल IVGEN सिस्टम का उन्नत संस्करण है। पहले का सिस्टम आकार में बड़ा और भारी था, जबकि नया संस्करण छोटा, हल्का और अधिक कुशल है।

कुरको के अनुसार, “यदि मंगल मिशन में 100 लीटर आईवी फ्लूइड ले जाना हो, तो 100 अलग-अलग बैग काफी जगह घेरेंगे। इसके बजाय यह छोटा सिस्टम ले जाकर जरूरत के अनुसार ताजा फ्लूइड तैयार करना ज्यादा व्यावहारिक है।”

यह सिस्टम प्रति घंटे लगभग 1.2 लीटर आईवी द्रव तैयार करने में सक्षम है।

भविष्य के मिशनों के लिए गेम-चेंजर
यह तकनीक भविष्य के लंबी अवधि वाले अंतरिक्ष अभियानों के लिए “गेम-चेंजर” साबित हो सकती है। इससे न केवल वजन और स्थान की बचत होगी, बल्कि अंतरिक्ष यात्रियों को हमेशा ताजा और सुरक्षित चिकित्सा सुविधा भी मिल सकेगी।

नासा की यह उपलब्धि मानव को गहरे अंतरिक्ष में लंबे समय तक सुरक्षित रखने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

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