यूपी में कोई सरकारी स्कूल बंद नहीं, कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों की होगी पेयरिंग: संदीप सिंह

उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में कोई भी सरकारी परिषदीय विद्यालय बंद नहीं किया गया है। कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों को निकटवर्ती स्कूलों से पेयरिंग कर बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है, जबकि रिक्त भवनों में बाल वाटिकाएं संचालित की जाएंगी।

लखनऊ, 29 जुलाई 2026। उत्तर प्रदेश सरकार ने परिषदीय विद्यालयों को बंद किए जाने की चर्चाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि प्रदेश में 1.32 लाख से अधिक सरकारी प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं और इनमें से किसी भी विद्यालय को बंद नहीं किया गया है। सरकार ने कहा कि कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों के विद्यार्थियों की निकटवर्ती विद्यालयों से पेयरिंग की जा रही है, ताकि बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण, पर्याप्त शिक्षक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके।

बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि यह कदम विद्यालयों को बंद करने के लिए नहीं, बल्कि उपलब्ध संसाधनों के प्रभावी उपयोग और छात्रों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उठाया गया है। उन्होंने बताया कि पेयरिंग के बाद रिक्त हुए विद्यालय भवनों में पहली बार बाल वाटिकाओं और प्री-प्राइमरी कक्षाओं का संचालन शुरू किया जा रहा है, जिससे प्रारंभिक बाल शिक्षा को नई मजबूती मिलेगी।

2017 के बाद शिक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव

राज्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 के बाद प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन हुए हैं। शिक्षा का बजट ₹28 हजार करोड़ से बढ़कर ₹1.13 लाख करोड़ से अधिक हो गया है। इसी अवधि में सरकारी विद्यालयों में नामांकन 1.34 करोड़ से बढ़कर लगभग 1.90 करोड़ तक पहुंच गया है, जो सरकारी स्कूलों के प्रति बढ़ते भरोसे का संकेत है।

उन्होंने बताया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर आधारभूत सुविधाओं और प्रभावी योजनाओं के चलते विद्यालय छोड़ने वाले बच्चों (ड्रॉपआउट) की दर 19 प्रतिशत से घटकर मात्र 3 प्रतिशत रह गई है।

ऑपरेशन कायाकल्प से बदली सरकारी स्कूलों की तस्वीर

सरकार के अनुसार ऑपरेशन कायाकल्प के तहत परिषदीय विद्यालयों में 19 आधारभूत सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। वर्ष 2017 में जहां इन मानकों पर उपलब्धि लगभग 36 प्रतिशत थी, वहीं अब यह बढ़कर 97 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। इससे विद्यालयों में पेयजल, शौचालय, बिजली, फर्नीचर, स्मार्ट कक्षाएं और अन्य बुनियादी सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

रिक्त भवनों में चलेंगी बाल वाटिकाएं

विभाग ने बताया कि जिन विद्यालय भवनों में पेयरिंग के बाद नियमित कक्षाएं नहीं चलेंगी, उनका उपयोग तीन से छह वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए बाल वाटिकाओं और प्री-प्राइमरी शिक्षा केंद्रों के रूप में किया जाएगा। यह व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप प्रारंभिक बाल शिक्षा, आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

सरकार का दावा

बेसिक शिक्षा विभाग का कहना है कि विद्यालयों की पेयरिंग पूरी तरह बच्चों के हित में एक प्रशासनिक व्यवस्था है। इसका उद्देश्य उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना है। विभाग ने दोहराया कि प्रदेश का कोई भी परिषदीय विद्यालय बंद नहीं किया गया है।

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