लखनऊ, 18 जुलाई। आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद एवं उत्तर प्रदेश प्रभारी संजय सिंह ने जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाने की कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार शांतिपूर्ण विरोध को दबाने के लिए पुलिस बल का इस्तेमाल कर रही है।
लखनऊ में जारी बयान में संजय सिंह ने कहा कि 21 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक को उनकी मांगों पर बातचीत करने के बजाय जबरन हटाया गया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और उसे बलपूर्वक रोकना उचित नहीं है।
संजय सिंह ने आरोप लगाया कि लंबे समय से अनशन पर बैठे वांगचुक की मांगों पर सरकार ने संवाद स्थापित करने की कोई पहल नहीं की। उनके अनुसार, सरकार का कोई प्रतिनिधि उनसे मिलने या उनकी चिंताओं को सुनने नहीं पहुंचा।
आप सांसद ने यह भी दावा किया कि जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया गया और सोनम वांगचुक को उनके अनशन स्थल से हटाकर अस्पताल में भर्ती कराया गया। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताते हुए इसकी निंदा की।
संजय सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि प्रस्तावित संसद मार्च को देखते हुए सरकार आंदोलन को रोकने का प्रयास कर रही है। उन्होंने दावा किया कि सरकार आंदोलन के व्यापक रूप लेने की आशंका से चिंतित है।
अपने बयान में उन्होंने केंद्र सरकार पर सत्ता के अहंकार का आरोप लगाते हुए कहा कि देश का युवा अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाता रहेगा। उन्होंने युवाओं से लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने तथा सोनम वांगचुक के समर्थन में एकजुट रहने की अपील की।
हालांकि, संजय सिंह के इन आरोपों पर समाचार लिखे जाने तक केंद्र सरकार या दिल्ली पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। वहीं, इससे पहले प्रशासन की ओर से कहा गया था कि सोनम वांगचुक को उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए चिकित्सा देखभाल के लिए अस्पताल ले जाया गया।
मुख्य बिंदु
संजय सिंह ने पुलिस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताया।
केंद्र सरकार पर शांतिपूर्ण आंदोलन दबाने का आरोप लगाया।
सरकार पर संवाद न करने और आंदोलन को रोकने की कोशिश करने का आरोप।
युवाओं से लोकतांत्रिक तरीके से एकजुट रहने की अपील।
आरोपों पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई।