नई दिल्ली | 30 जुलाई 2026 (यूएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने 2005 के बहुचर्चित तालाबीरा-II कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ चल रही सभी आपराधिक कार्यवाहियों को समाप्त कर दिया है। शीर्ष अदालत ने विशेष अदालत (स्पेशल कोर्ट) के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें डॉ. मनमोहन सिंह समेत अन्य आरोपियों को समन जारी किया गया था। साथ ही केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि मामले को आगे बढ़ाने का कोई कानूनी आधार नहीं बचता।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि सीबीआई द्वारा दाखिल दोनों क्लोजर रिपोर्ट कानून के अनुरूप थीं। अदालत ने माना कि जांच एजेंसी ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उचित निष्कर्ष निकाला था और ट्रायल कोर्ट के पास इन रिपोर्टों को खारिज करने के लिए पर्याप्त एवं ठोस कानूनी कारण मौजूद नहीं थे।
स्पेशल कोर्ट का आदेश नहीं टिक सका
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यदि जांच एजेंसी विस्तृत जांच के बाद क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करती है तो उसे खारिज करने के लिए अदालत के पास स्पष्ट और मजबूत कानूनी आधार होना आवश्यक है। इस मामले में ऐसा कोई आधार सामने नहीं आया, इसलिए स्पेशल कोर्ट द्वारा जारी समन आदेश कानून की कसौटी पर टिक नहीं सकता।
क्या था मामला
यह मामला वर्ष 2005 में ओडिशा स्थित तालाबीरा-II कोयला ब्लॉक के आवंटन से जुड़ा है। उस समय केंद्र में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की सरकार थी और तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के पास कोयला मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी था। आरोप था कि कोयला ब्लॉक आवंटन प्रक्रिया में अनियमितताएं हुईं और कुछ निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
मामले में उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला, पूर्व कोयला सचिव पी.सी. पारख तथा अन्य अधिकारियों के नाम भी जांच के दायरे में आए थे।
सीबीआई ने मांगी थी केस बंद करने की अनुमति
सीबीआई ने विस्तृत जांच के बाद अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करते हुए कहा था कि उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर किसी भी आरोपी के खिलाफ आपराधिक साजिश या भ्रष्टाचार का मामला सिद्ध नहीं होता। इसी आधार पर जांच एजेंसी ने मामले को बंद करने की अनुमति मांगी थी।
हालांकि, मार्च 2015 में स्पेशल कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करने से इनकार करते हुए डॉ. मनमोहन सिंह, कुमार मंगलम बिड़ला, पी.सी. पारख और अन्य आरोपियों को तलब करने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ सभी आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जहां उसी वर्ष समन आदेश पर रोक लगा दी गई थी।
एक दशक पुराने मामले का पटाक्षेप
करीब एक दशक से अधिक समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम फैसला सुनाते हुए न केवल स्पेशल कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया, बल्कि सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को भी पूरी तरह सही ठहराया। अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी की रिपोर्ट में ऐसी कोई कमी नहीं है, जिसके आधार पर मुकदमे को आगे बढ़ाया जा सके।
इस फैसले के साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला, पूर्व कोयला सचिव पी.सी. पारख और अन्य आरोपियों के खिलाफ कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में सभी आपराधिक कार्यवाहियां समाप्त हो गई हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच एजेंसियों की निष्पक्ष जांच और उनके निष्कर्षों को बिना पर्याप्त कानूनी आधार के अस्वीकार नहीं किया जा सकता।
यह फैसला न केवल इस बहुचर्चित मामले का समापन करता है, बल्कि भविष्य में क्लोजर रिपोर्टों पर न्यायिक समीक्षा के मानकों को भी स्पष्ट करता है।