नोएडा हिंसा मामले में बड़ा खुलासा: महिलाओं को दिया गया था विशेष प्रशिक्षण, CCTV फुटेज छिपाने की साजिश

नोएडा, 23 अप्रैल 2026 (यूएनएस)। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में श्रमिक आंदोलन के दौरान हुई हिंसा की जांच में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान महिलाओं को इस तरह प्रशिक्षित किया गया था कि वे CCTV कैमरों की फुटेज को बाधित कर सकें।

जांच एजेंसियों को ऐसे कई वीडियो और फुटेज मिले हैं, जिनमें महिलाएं कैमरों पर दुपट्टा या कपड़ा डालती हुई या उन्हें नुकसान पहुंचाती नजर आ रही हैं। पुलिस का दावा है कि यह सब सुनियोजित तरीके से किया गया, ताकि आरोपियों की पहचान न हो सके।

इस पूरे मामले की जांच के लिए जिला पुलिस ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जिसमें एडिशनल डीसीपी स्तर के अधिकारी समेत कई अनुभवी पुलिसकर्मी शामिल हैं। हिंसा से जुड़े सभी मुकदमों को अब इसी SIT के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है।

पुलिस ने अब तक चिन्हित आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए SWAT और CRT समेत छह टीमों को तैनात किया है, जो लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। इस मामले में आरोपी रूपेश राय के कोर ग्रुप से जुड़ी मनीषा, आकृति और सृष्टि गुप्ता को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है।

पूछताछ के दौरान प्रदर्शन में युवतियों की भूमिका और अन्य संगठित गतिविधियों को लेकर जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस ने यह भी जांच की है कि इन आरोपियों के आदित्य आनंद से क्या संबंध हैं, जिन्हें इस मामले का मुख्य साजिशकर्ता बताया जा रहा है।

जांच में यह भी सामने आया है कि एक संगठन कथित तौर पर अपने ऑनलाइन पोर्टल और वेबसाइट के जरिए श्रमिकों को उकसाने का काम कर रहा था। डिजिटल माध्यमों के जरिए भीड़ को संगठित करने और भड़काने के प्रयासों की भी जांच की जा रही है।

मुख्य आरोपी आदित्य आनंद की पुलिस कस्टडी रिमांड को लेकर 24 अप्रैल को सुनवाई होनी है। पुलिस ने अदालत से सात दिन की रिमांड की मांग की है। इसके अलावा आरोपियों से बरामद मोबाइल और लैपटॉप की फॉरेंसिक जांच जारी है।

कुछ संवेदनशील डेटा की जांच के लिए पुलिस ने गूगल प्रबंधन से भी संपर्क किया है। अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही तकनीकी जानकारी उपलब्ध होगी, मामले में और भी अहम खुलासे हो सकते हैं।

पुलिस का दावा है कि यह पूरा घटनाक्रम एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा हो सकता है, जिसका उद्देश्य प्रदेश की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नुकसान पहुंचाना था। फिलहाल, जांच जारी है और आने वाले दिनों में और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की संभावना है।

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