पश्चिम बंगाल-तमिलनाडु चुनाव: बंपर मतदान के बीच हिंसा, भाजपा एजेंट पर हमला, कई इलाकों में तनाव

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के तहत गुरुवार को मतदान संपन्न हो गया। दोनों राज्यों में शाम छह बजे आधिकारिक रूप से वोटिंग समाप्त हो गई, हालांकि कई स्थानों पर कतार में लगे मतदाताओं ने इसके बाद भी अपने मताधिकार का प्रयोग किया। निर्वाचन आयोग द्वारा अंतिम मतदान प्रतिशत जारी किया जाना बाकी है, लेकिन शुरुआती संकेतों में बंपर वोटिंग की बात सामने आ रही है।

पश्चिम बंगाल में पहले चरण के तहत 16 जिलों की 152 सीटों पर मतदान हुआ, जबकि तमिलनाडु में सभी 234 सीटों पर एक ही चरण में वोट डाले गए। लोकतंत्र के इस महापर्व में जहां एक ओर मतदाताओं में उत्साह दिखा, वहीं दूसरी ओर पश्चिम बंगाल के कई इलाकों से हिंसा और तनाव की खबरें भी सामने आईं।

बीरभूम जिले के दुबराजपुर विधानसभा क्षेत्र के खैरासोल घुमर गांव में तैनात केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों पर अचानक पथराव कर दिया गया। इस घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर हालात को नियंत्रित किया गया।

इसी तरह मालदा जिले की चांचल विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार रतन दास के पोलिंग एजेंट लक्ष्मण पांडेय पर कथित तौर पर तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हमला कर दिया। आरोप है कि उनकी गाड़ी में तोड़फोड़ की गई और उन्हें बूथ तक पहुंचने से रोका गया। पांडेय ने दावा किया कि करीब 150 से 200 मतदाताओं को वोट डालने से भी रोका गया।

वहीं बीरभूम के लाबपुर क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार देबाशीष ओझा के चुनाव एजेंट बिश्वजीत मंडल पर भी हमला हुआ। मंडल ने आरोप लगाया कि बूथ कैप्चरिंग की सूचना पर पहुंचने के दौरान उन्हें घेरकर पीटा गया और उनकी कार को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। इस हमले में उन्हें सिर में चोट आई।

दक्षिण दिनाजपुर के कुमारगंज और मुर्शिदाबाद के नवादा विधानसभा क्षेत्र से भी झड़प और तनाव की खबरें आईं। नवादा में आम जनता उन्नयन पार्टी से जुड़े हुमायूं कबीर और तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच टकराव हुआ, जिसमें दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर माहौल बिगाड़ने के आरोप लगाए।

इस बीच बहरामपुर सीट से कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने चुनाव आयोग की सख्ती की सराहना करते हुए कहा कि इससे क्षेत्र में गुंडागर्दी में कमी आई है और निष्पक्ष चुनाव की उम्मीद मजबूत हुई है।

चुनाव आयोग ने इन घटनाओं का संज्ञान लेते हुए वीडियो फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उनकी तत्काल गिरफ्तारी के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी है।

कुल मिलाकर, जहां एक ओर भारी मतदान ने लोकतंत्र की मजबूती का संकेत दिया, वहीं हिंसा की घटनाओं ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।

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