गुणवत्तापूर्ण इलाज पर योगी सरकार का फोकस, आयुष्मान में गड़बड़ी करने वाले अस्पतालों पर सख्ती

800 एनएबीएच अस्पतालों को डिजिटल हेल्थ ट्रेनिंग, 1.16 करोड़ का जुर्माना; बार-बार नियम तोड़ने वाले अस्पताल योजना से बाहर

लखनऊ, 11 जुलाई। उत्तर प्रदेश में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) को अधिक पारदर्शी, तकनीक आधारित और मरीज-केंद्रित बनाने के लिए योगी सरकार ने गुणवत्ता सुधार अभियान तेज कर दिया है। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (SACHIS) ने प्रदेश के 800 एनएबीएच (NABH) मान्यता प्राप्त अस्पतालों को आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के मानकों के अनुरूप प्रशिक्षित किया है। इसके साथ ही अवैध वसूली, अपकोडिंग और फर्जी दावों जैसी वित्तीय अनियमितताओं पर कड़ी कार्रवाई करते हुए चालू वित्तीय वर्ष में अब तक दोषी अस्पतालों पर करीब 1.16 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (साचीज) की मुख्य कार्यपालक अधिकारी अर्चना वर्मा के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य केवल अस्पतालों का डिजिटलीकरण नहीं, बल्कि आयुष्मान लाभार्थियों को बेहतर, पारदर्शी और मानकीकृत उपचार उपलब्ध कराना है। प्रशिक्षण कार्यक्रम राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान, लखनऊ के माध्यम से आयोजित किया गया, जिसमें अस्पतालों को डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड, इंटरऑपरेबिलिटी, मरीज सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों पर प्रशिक्षित किया गया। यह पहल केंद्र सरकार के आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन और एनएबीएच के डिजिटल हेल्थ मानकों के अनुरूप है।

अनियमितताओं पर जीरो टॉलरेंस

साचीज ने स्पष्ट किया है कि आयुष्मान योजना में किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी या मरीजों से अवैध नकद वसूली को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच में दोषी पाए गए अस्पतालों पर अब तक लगभग 1.16 करोड़ रुपये का आर्थिक दंड लगाया गया है, जिसमें से करीब 60 लाख रुपये की वसूली भी हो चुकी है। शेष राशि की वसूली के लिए संबंधित अस्पतालों के भुगतान रोक दिए गए हैं। लगातार नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों को योजना से निलंबित भी किया जा रहा है।

पहले भी हुई थी बड़ी कार्रवाई

यह पहली बार नहीं है जब उत्तर प्रदेश सरकार ने आयुष्मान योजना में अनियमितताओं पर सख्ती दिखाई हो। मई 2026 में भी राज्य सरकार ने लगभग 200 निजी अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की थी। इनमें करीब 100 अस्पतालों के भुगतान रोके गए थे, जबकि लगभग 100 अस्पतालों को योजना से निलंबित कर दिया गया था। उस समय भी अस्पतालों पर निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन न करने और योजना के दुरुपयोग के आरोप लगे थे।

डिजिटल सिस्टम से बढ़ेगी पारदर्शिता

विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों में डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड, ऑनलाइन क्लेम प्रोसेसिंग और एबीडीएम आधारित सिस्टम लागू होने से फर्जी क्लेम, अपकोडिंग और मरीजों से अवैध वसूली जैसी शिकायतों पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकेगी। केंद्र सरकार भी एबीडीएम से जुड़े अस्पतालों को डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड और इंटरऑपरेबल सिस्टम अपनाने के लिए प्रोत्साहन दे रही है।

सरकार का संदेश साफ

योगी सरकार ने संकेत दिया है कि आयुष्मान योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों के लिए गुणवत्ता और पारदर्शिता अब अनिवार्य होगी। जिन अस्पतालों में मरीजों के हितों की अनदेखी, अवैध वसूली या वित्तीय अनियमितताएं सामने आएंगी, उनके खिलाफ आर्थिक दंड से लेकर योजना से निष्कासन तक की कार्रवाई जारी रहेगी। सरकार का कहना है कि लक्ष्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि प्रदेश के करोड़ों आयुष्मान लाभार्थियों को भरोसेमंद और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *