उत्तराखंड में बारिश का कहर: भूस्खलन से 118 सड़कें बंद, कुमाऊं में 36 मार्ग ठप; कई गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूटा

चारधाम यात्रा प्रभावित, नदियां उफान पर, सात जिलों में भारी बारिश का यलो अलर्ट

देहरादून, 11 जुलाई। उत्तराखंड में लगातार 48 घंटे से हो रही मूसलधार बारिश ने जनजीवन बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। पहाड़ों में भूस्खलन और मलबा आने से राज्यभर में 118 सड़कें बंद हो गई हैं, जिनमें अकेले कुमाऊं मंडल की 36 सड़कें शामिल हैं। कई गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क कट गया है, जबकि चारधाम यात्रा मार्ग भी कई स्थानों पर बाधित है। नदियों के बढ़ते जलस्तर, जलभराव और बिजली उत्पादन प्रभावित होने से प्रशासन हाई अलर्ट पर है।

कुमाऊं मंडल के अपर आयुक्त जीवन सिंह नागन्याल के अनुसार, मंडल की कुल 4,303 सड़कों में से 36 मार्ग अभी भी बंद हैं। इनमें चार राज्य मार्ग और चार जिला मार्ग शामिल हैं। हालांकि पिछले 24 घंटे में 18 बंद सड़कों को यातायात के लिए खोल दिया गया है। बारिश के कारण ओखलकांडा के पिनरौ क्षेत्र और चंपावत जिले की मंच उपतहसील के तरकूली गांव में बिजली आपूर्ति भी बाधित हो गई है। इस मानसून सीजन में अब तक 16 आवासीय भवन आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं।

जिलेवार सड़कों की स्थिति

  • नैनीताल: 1,264 में से 11 सड़कें बंद
  • पिथौरागढ़: 460 में से 11 सड़कें बंद
  • अल्मोड़ा: 544 में से 6 सड़कें बंद
  • बागेश्वर: 235 में से 5 सड़कें बंद
  • चंपावत: 462 में से 3 सड़कें बंद

सचिव मुख्यमंत्री एवं कुमाऊं मंडल के आयुक्त दीपक रावत ने सभी जिलाधिकारियों और संबंधित विभागों को बंद सड़कों को युद्ध स्तर पर खोलने तथा प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं।

चारधाम यात्रा पर असर

उत्तरकाशी जिले में यमुनोत्री धाम के प्रमुख पड़ाव स्यानाचट्टी में यमुना नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने से फिर झील बनने का खतरा पैदा हो गया है। नदी का पानी कई होटल, होमस्टे और मकानों के भूतल तक पहुंच गया है। वहीं, स्यानाचट्टी में यमुनोत्री हाईवे का करीब 100 मीटर हिस्सा भूस्खलन में बह जाने से मार्ग 27 घंटे से अधिक समय तक बंद रहा। यात्री जंगल के बीच बनी फिसलनभरी पगडंडी से पैदल आवागमन करने को मजबूर हैं।

सीमावर्ती इलाकों में भी असर

पिथौरागढ़ जिले में चीन सीमा को जोड़ने वाला तवाघाट-लिपुलेख राष्ट्रीय राजमार्ग करीब 28 घंटे तक भूस्खलन के कारण बंद रहा। इससे सीमांत क्षेत्रों में आवागमन और आपूर्ति प्रभावित हुई।

नदियां उफान पर, मैदानों में जलभराव

लगातार बारिश के कारण गंगा, यमुना, भागीरथी, गोमती, काली और गोरी नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में 150 से 200 मिमी तक वर्षा दर्ज की गई, जिससे कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई। कई जर्जर भवनों को नुकसान पहुंचने के बाद प्रशासन ने एहतियातन प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है।

बिजली उत्पादन पर पड़ा असर

यमुना और टोंस नदी का जलस्तर बढ़ने से पछवादून क्षेत्र के जल विद्युत संयंत्रों पर भी असर पड़ा। गुरुवार देर रात ढकरानी और ढालीपुर जल विद्युत परियोजनाओं में उत्पादन रोकना पड़ा, जबकि शुक्रवार सुबह छिबरो और खोदरी परियोजनाओं का संचालन भी अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। बाद में जलस्तर सामान्य होने पर उत्पादन दोबारा शुरू कर दिया गया। व्यासी परियोजना से बिजली उत्पादन लगातार जारी रहा, जबकि कुल्हाल परियोजना में उत्पादन सामान्य से कम दर्ज किया गया।

सात जिलों में यलो अलर्ट

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने शनिवार के लिए देहरादून, पौड़ी, पिथौरागढ़, ऊधमसिंह नगर, चंपावत, नैनीताल और बागेश्वर जिलों में भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। पर्वतीय क्षेत्रों में गरज-चमक, आकाशीय बिजली और तेज वर्षा की चेतावनी दी गई है।

मौसम विभाग का कहना है कि शनिवार से बारिश की तीव्रता कुछ कम हो सकती है, लेकिन प्रदेश के कई हिस्सों में भारी वर्षा का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों के किनारे न जाने, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने और केवल आवश्यक होने पर ही यात्रा करने की अपील की है।

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