यूपी को मिलेगा एक और 6-लेन हाईवे, नेपाल तक बढ़ेगी कनेक्टिविटी


वन विभाग की एनओसी में देरी से अटका प्रोजेक्ट, 9 हजार पेड़ों की कटान बनी बड़ी बाधा

लखनऊ, 30 अप्रैल 2026 (यूएनएस)।
उत्तर प्रदेश को जल्द ही एक और अत्याधुनिक 6-लेन राष्ट्रीय राजमार्ग मिलने जा रहा है, जो राज्य की कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देगा और नेपाल के साथ व्यापारिक संबंधों को भी मजबूत करेगा। बाराबंकी से बहराइच के बीच बनने वाले इस हाईवे को कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन वन विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) न मिलने के कारण परियोजना फिलहाल अटकी हुई है।

यह राष्ट्रीय राजमार्ग मुस्तफाबाद से कैसरगंज होते हुए बहराइच तक जाएगा और इसकी कुल लंबाई 101.51 किलोमीटर होगी। करीब 6,969 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य राज्य के प्रमुख आर्थिक और लॉजिस्टिक केंद्रों के बीच निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करना है। परियोजना को हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) के तहत विकसित किया जाएगा।

पेड़ों की कटान पर अटका मामला

इस परियोजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती वन विभाग की 70 हेक्टेयर जमीन और उस पर मौजूद करीब 9,300 पेड़ों की कटान है। वन विभाग ने इस पर आपत्ति जताते हुए हाईवे के अलाइनमेंट में बदलाव की मांग की है। विभाग का तर्क है कि इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई पर्यावरण के लिए नुकसानदायक होगी।

वहीं, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) का कहना है कि अलाइनमेंट को पहले ही प्रधानमंत्री कार्यालय से मंजूरी मिल चुकी है। ऐसे में बदलाव करना संभव नहीं है। अगर अलाइनमेंट बदला जाता है, तो हाईवे शहर के भीतर से गुजरेगा, जिससे सैकड़ों मकानों का अधिग्रहण करना पड़ेगा और परियोजना की लागत में भारी बढ़ोतरी होगी।

देरी से प्रभावित हो सकता है टाइमलाइन

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने दावा किया है कि यह हाईवे अक्टूबर 2027 तक बनकर तैयार हो जाएगा। हालांकि, वन विभाग से अनुमति और भूमि अधिग्रहण में देरी के चलते इस समयसीमा पर असर पड़ने की आशंका है।
एनएचएआई के अधिकारी पिछले चार महीनों से वन विभाग के साथ लगातार पत्राचार कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका है।

दस गुना पेड़ लगाने का प्रस्ताव

एनएचएआई ने पेड़ों की कटान के बदले दस गुना पौधारोपण का प्रस्ताव दिया है। साथ ही, 70 हेक्टेयर जमीन के एवज में 8 से 9 करोड़ रुपये मुआवजा देने की भी बात कही गई है।

नेपाल से व्यापार को मिलेगा बढ़ावा

यह हाईवे सिर्फ बाराबंकी और बहराइच को ही नहीं जोड़ेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अहम भूमिका निभाएगा। नेपालगंज सीमा के जरिए भारत-नेपाल के बीच एक मजबूत ट्रेड कॉरिडोर विकसित होगा। रूपईडीहा भूमि बंदरगाह तक पहुंच आसान होने से सीमा पार व्यापार और निवेश में तेजी आने की उम्मीद है।

पर्यटन को भी मिलेगा फायदा

इस परियोजना से प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान हो जाएगी। कतर्निया घाट, दुधवा नेशनल पार्क और सोहेलवा वन्यजीव अभयारण्य जैसे फॉरेस्ट टूरिज्म स्थलों के अलावा अयोध्या राम मंदिर, देवीपाटन धाम और श्रावस्ती जैसे धार्मिक स्थलों तक पहुंच भी सुगम होगी।

हाईवे बनने के बाद लखनऊ से बहराइच की दूरी महज डेढ़ घंटे में तय की जा सकेगी, जिससे क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी।

क्या कहते हैं अधिकारी

एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी गौतम विशाल के अनुसार, वन विभाग से एनओसी मिलते ही काम तेज़ी से शुरू कर दिया जाएगा। परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा ने बताया कि अलाइनमेंट में बदलाव की संभावना बेहद कम है क्योंकि इसे केंद्र स्तर पर पहले ही मंजूरी मिल चुकी है।

वहीं, बहराइच के डीएफओ सुंदर सेन का कहना है कि पूरे मामले से केंद्र सरकार को अवगत करा दिया गया है और समाधान निकालने के प्रयास जारी हैं।

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *