महिला आरक्षण पर यूपी विधानसभा के बाहर सियासी संग्राम, भाजपा महिला विधायकों का प्रदर्शन

लखनऊ, 30 अप्रैल 2026 (यूएनएस)। उत्तर प्रदेश विधानसभा के एकदिवसीय विशेष सत्र से पहले महिला आरक्षण के मुद्दे पर राजधानी लखनऊ में सियासी तापमान चरम पर पहुंच गया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की महिला विधायकों ने विपक्ष के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए उन्हें महिला आरक्षण का विरोधी करार दिया।

विधान भवन परिसर में स्थित चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा के सामने भाजपा महिला विधायकों ने हाथों में “मातृशक्ति का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान” जैसे बैनर लेकर प्रदर्शन किया। इससे पहले समाजवादी पार्टी (सपा) के सदस्यों ने भी इसी स्थान पर विरोध दर्ज कराया था, जिसके जवाब में भाजपा महिला विधायकों ने मोर्चा संभाला।

महिला मंत्रियों और विधायकों का हमला

प्रदर्शन में शामिल प्रदेश की महिला कल्याण एवं बाल विकास मंत्री बेबी रानी मौर्य ने विपक्षी दलों पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि सपा और कांग्रेस ने महिला आरक्षण का विरोध किया है और इसका राजनीतिक खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ेगा।
उन्होंने कहा, “इस मुद्दे पर हम सभी महिलाएं एकजुट हैं और अपने अधिकार लेकर रहेंगे।”

भाजपा विधायक केतकी सिंह ने इसे प्रदेश की करोड़ों महिलाओं का आक्रोश बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने महिला आरक्षण में बाधा डालकर महिलाओं के साथ धोखा किया है और यह प्रदर्शन केवल शुरुआत है।
“जल्द ही हर गली, हर चौराहे और हर घर की महिला इस आंदोलन का हिस्सा बनेगी,” उन्होंने कहा।

राज्य मंत्री विजयलक्ष्मी गौतम ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए विधेयक लाए थे, लेकिन विपक्षी दलों ने इसे पारित होने से रोकने का प्रयास किया। उन्होंने इसे “आधी आबादी के साथ घृणित अन्याय” बताया।

विशेष सत्र में निंदा प्रस्ताव की तैयारी

विधानसभा का विशेष सत्र आज आयोजित किया जा रहा है, जिसमें सरकार महिला आरक्षण संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित न होने के लिए विपक्षी दलों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की तैयारी में है।
सरकार का उद्देश्य इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से उभारते हुए 2027 के चुनाव से पहले विपक्ष को महिला-विरोधी के रूप में पेश करना माना जा रहा है।

विपक्ष भी हमलावर

वहीं, विपक्ष इस पूरे मुद्दे को राजनीतिक करार देते हुए सरकार के रुख का विरोध कर रहा है। सपा और कांग्रेस का कहना है कि महिला सशक्तीकरण के नाम पर राजनीति की जा रही है और वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है।

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