लखनऊ, 30 अप्रैल 2026 (यूएनएस)। उत्तर प्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र आज से शुरू हो रहा है, जिसे लेकर प्रदेश की राजनीति पूरी तरह गर्म हो गई है। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन और विपक्ष के बीच महिला आरक्षण के मुद्दे पर तीखी टकराहट के आसार हैं। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से करीब दस महीने पहले बुलाया गया यह सत्र राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सत्र से पहले प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने अपने विधायकों की बैठक बुलाकर रणनीति तय करने की तैयारी की है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने जानकारी दी कि पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में बैठक आयोजित कर सरकार के रुख का जवाब देने की रणनीति बनाई जाएगी। वहीं कांग्रेस भी इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने में जुटी है। कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि पार्टी महिला आरक्षण के मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रही है और बेहतर तालमेल के लिए समाजवादी पार्टी से भी बातचीत की जाएगी।
विपक्ष का कहना है कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि राज्य सरकार सदन में महिला आरक्षण से जुड़ा कोई ठोस प्रस्ताव लाएगी या नहीं, लेकिन सरकार के हर कदम पर नजर रखी जा रही है। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी विपक्ष को संसद में संविधान संशोधन विधेयक को पारित न होने देने के मुद्दे पर घेरने की तैयारी में है। इस संशोधन का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को अधिक प्रतिनिधित्व देना और सीटों की संख्या में वृद्धि करना बताया जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही महिला सशक्तिकरण को लेकर प्रदेश में सक्रिय नजर आ रहे हैं। हाल ही में उन्होंने ‘जन आक्रोश महिला पदयात्रा’ का नेतृत्व किया, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में महिला रैली के जरिए इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रमुखता दी है। ऐसे में माना जा रहा है कि सत्र के दौरान महिला आरक्षण और महिलाओं की भागीदारी का मुद्दा केंद्र में रहेगा।
इधर, विधानसभा की कार्यमंत्रणा समिति की बैठक भी आज आयोजित होगी, जिसमें सत्र के एजेंडे को अंतिम रूप दिया जाएगा। सरकार की ओर से महिला सशक्तिकरण पर व्यापक चर्चा के साथ-साथ बजट सत्र के बाद जारी छह अध्यादेशों को भी सदन में पेश किए जाने की संभावना है। इनमें राजस्व संहिता संशोधन अध्यादेश 2026 प्रमुख माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, यह विशेष सत्र केवल औपचारिक कार्यवाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले चुनावों की दिशा तय करने वाला राजनीतिक मंच भी साबित हो सकता है। सत्ता पक्ष जहां महिला आरक्षण को अपनी उपलब्धि के रूप में पेश करने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है। ऐसे में विधानसभा का यह सत्र आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति की नई दिशा तय कर सकता है।
