चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में इस बार अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिला है। फिल्म अभिनेता से नेता बने विजय ने अपनी पार्टी के पहले ही चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए द्रविड़ मुनेत्र कषगम और अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम समेत 35 से अधिक राजनीतिक दलों को पीछे छोड़ दिया है। उनकी इस जीत के साथ राज्य को छठवीं बार फिल्म जगत से जुड़ा मुख्यमंत्री मिलने जा रहा है।
विजय की जीत को लोकतंत्र में जनसमर्थन की चरम अभिव्यक्ति माना जा रहा है। उनके प्रशंसकों का समर्थन सीधे मतों में बदल गया, जिसने पारंपरिक राजनीति के समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया। चुनाव से पहले अधिकांश आकलनों में द्रविड़ मुनेत्र कषगम की जीत का अनुमान लगाया गया था, लेकिन परिणाम इसके विपरीत रहे।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार विजय की इस सफलता के पीछे उनकी वर्षों से की जा रही सामाजिक सक्रियता अहम रही। पार्टी गठन से पहले ही वे जरूरतमंद परिवारों की सहायता, बेटियों की शिक्षा और विवाह में सहयोग जैसे कार्य करते रहे। यही कारण रहा कि युवाओं और महिलाओं का व्यापक समर्थन उन्हें मिला।
अभिनेता विजय की ऐतिहासिक जीत, द्रविड़ दलों समेत 35 पार्टियों को दी शिकस्त
इस चुनाव परिणाम ने यह भी सिद्ध किया कि एक लोकप्रिय फिल्म अभिनेता प्रभावी जननेता बन सकता है। जो लोग उन्हें राजनीति में अनुभवहीन मान रहे थे, उनके लिए यह परिणाम एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर सामने आया है।
द्रविड़ मुनेत्र कषगम के अध्यक्ष एम. के. स्टालिन को भी इस चुनाव में बड़ा झटका लगा। वे अपनी पारंपरिक सीट बचाने में असफल रहे और तमिलनाडु के उन नेताओं की सूची में शामिल हो गए, जो मुख्यमंत्री रहते हुए अपनी सीट हार गए। इससे पहले जयललिता भी ऐसा अनुभव कर चुकी हैं।
चुनाव में केवल मुख्यमंत्री ही नहीं, बल्कि सरकार के कई मंत्री और बड़े नेता भी अपनी सीट नहीं बचा सके। इस बार राज्य में गठबंधन सरकार बनने की स्थिति भी बनती दिख रही है, जो कई वर्षों बाद देखने को मिलेगी।
चुनाव परिणाम के बाद एम. के. स्टालिन ने कहा कि उनकी पार्टी जनता के फैसले का सम्मान करती है और अब एक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाएगी।
तमिलनाडु की इस चुनावी तस्वीर ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि राजनीति में जनभावनाएं, नेतृत्व का प्रभाव और जमीनी जुड़ाव पारंपरिक गणनाओं से कहीं अधिक निर्णायक साबित हो सकते हैं।
