चंडीगढ़/नई दिल्ली। पंजाब की राजनीति में जारी हलचल के बीच मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेंगे। इस दौरान वह राज्य के मौजूदा हालातों के साथ-साथ हाल ही में पार्टी छोड़ने वाले राज्यसभा सांसदों के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाएंगे। मुख्यमंत्री मान सभी विधायकों के साथ दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं, हालांकि राष्ट्रपति भवन से केवल उन्हें ही मुलाकात की अनुमति मिली है।
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री मान राष्ट्रपति को प्रदेश की राजनीतिक स्थिति से अवगत कराते हुए बागी सांसदों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की मांग कर सकते हैं। उन्होंने पहले ही इन सांसदों को “जनादेश के साथ विश्वासघात” करार देते हुए कहा है कि पंजाब की जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी।
राइट टू रिकॉल की मांग भी उठेगी
मुख्यमंत्री मान इस मुलाकात में ‘राइट टू रिकॉल’ कानून लागू कराने की मांग भी उठाएंगे। उनका कहना है कि जनता को यह अधिकार मिलना चाहिए कि वह अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों को कार्यकाल के दौरान ही वापस बुला सके, यदि वे जनहित के विपरीत कार्य करते हैं या दल बदल करते हैं।
राघव चड्ढा भी करेंगे मुलाकात
मुख्यमंत्री मान से पहले पार्टी के वरिष्ठ नेता राघव चड्ढा भी राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे। बताया जा रहा है कि वह पंजाब में कानून-व्यवस्था, सीमा पार से हो रही नशे और हथियारों की तस्करी, तथा हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों पर राष्ट्रपति को विस्तृत जानकारी देंगे।
विपक्ष का तंज
इस पूरे घटनाक्रम पर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विधायकों को लेकर बस से दिल्ली जा रहे हैं, उन्हें सावधान रहना चाहिए कि कहीं यह बस भाजपा कार्यालय की ओर न मुड़ जाए। उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज हो गई है।
वित्त मंत्री का बयान
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पार्टी के सभी विधायक लोकतंत्र की रक्षा के लिए राष्ट्रपति से मिलने जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश हो रही है और पंजाब इस चुनौती का सामना करेगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति से अनुरोध किया जाएगा कि वह अपने संवैधानिक अधिकारों का उपयोग करते हुए इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करें।
राजनीतिक माहौल गरमाया
राज्यसभा सांसदों के दल बदलने के बाद पंजाब की राजनीति में तनाव बढ़ गया है। सत्तारूढ़ दल इस मुद्दे को जनादेश से जुड़ा बड़ा सवाल बना रहा है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक अवसर के रूप में देख रहा है।
अब सभी की नजर मुख्यमंत्री मान और राष्ट्रपति के बीच होने वाली इस महत्वपूर्ण मुलाकात पर टिकी है, जिससे आने वाले समय में राज्य और राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय हो सकती है।
