आगरा, 8 जून (यूएनएस)। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट में कथित चढ़ावा चोरी विवाद को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि “जब चोर को रक्षक बना दिया जाएगा तो ऐसा ही होगा।” उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर की व्यवस्था धर्माचार्यों के हाथ में होनी चाहिए थी, लेकिन उनकी जगह दूसरे लोगों को जिम्मेदारी सौंप दी गई।
आगरा में अपनी गविष्टि यात्रा के दौरान आयोजित कार्यक्रम में शंकराचार्य ने कहा कि राम मंदिर की व्यवस्था किसी संगठन का काम नहीं, बल्कि धर्माचार्यों का दायित्व था। उन्होंने आरोप लगाया कि धर्माचार्यों के रामालय ट्रस्ट को हटाकर भाजपा से जुड़े लोगों का ट्रस्ट बनाया गया। उन्होंने कहा कि पहले जमीन खरीद-फरोख्त को लेकर विवाद सामने आए और अब चढ़ावे से जुड़े आरोप सामने आ रहे हैं।
गौरतलब है कि शंकराचार्य की यह टिप्पणी उनके व्यक्तिगत विचार और आरोप हैं। संबंधित मामलों में आधिकारिक जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही तथ्यों की पुष्टि हो सकेगी।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की उस टिप्पणी पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को संत विरोधी बताया गया था। शंकराचार्य ने कहा कि इस विषय पर उनका अपना अनुभव हो सकता है, लेकिन संतों और सनातन धर्म के प्रतीकों के कथित अपमान के मामलों में सरकार की ओर से पर्याप्त प्रतिक्रिया नहीं दिखाई दी।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ घटनाओं में संतों के सम्मान से जुड़े मुद्दों पर न तो जांच कराई गई और न ही सरकार की ओर से स्पष्ट कार्रवाई देखने को मिली। उन्होंने कहा कि यदि इसके बावजूद राजनीतिक बयान दिए जाते हैं तो इसे राजनीति के रूप में देखा जाएगा।
शंकराचार्य की गविष्टि यात्रा गो-संरक्षण और जनजागरण के उद्देश्य से निकाली जा रही है। कार्यक्रम में मुस्लिम समाज के कुछ लोग गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग वाले पोस्टर लेकर पहुंचे। इस पर शंकराचार्य ने उनका स्वागत करते हुए कहा कि यह उनकी सद्भावना और सम्मान का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि गाय को माता का दर्जा हिंदू धर्म में दिया गया है और यदि अन्य समुदायों के लोग भी इस विषय पर समर्थन व्यक्त कर रहे हैं तो यह सकारात्मक पहल है। साथ ही उन्होंने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों को भी इस विषय पर अपना स्पष्ट रुख सामने रखना चाहिए।
समाजवादी पार्टी के प्रति अपने रुख को स्पष्ट करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि सैफई यात्रा के दौरान उनका स्वागत हुआ था और उन्होंने व्यक्तिगत स्तर पर आशीर्वाद भी दिया था। हालांकि उन्होंने कहा कि किसी राजनीतिक दल को संगठनात्मक समर्थन तभी मिलेगा, जब वह गाय को माता मानने संबंधी प्रस्ताव पारित करेगा।
उन्होंने कहा, “हमारी बात पूरी तरह स्पष्ट है। हम किसी के बारे में अनुमान नहीं लगाना चाहते। हम चाहते हैं कि गाय की सेवा और संरक्षण के पक्ष में खड़े होने वाले चेहरे स्पष्ट रूप से सामने आएं।”
