राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: चंपत राय और अनिल मिश्रा ने दिया इस्तीफा, ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने की पुष्टि

अयोध्या, 27 जून । राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी जांच और एफआईआर के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने दोनों के इस्तीफे की आधिकारिक पुष्टि की है।

चढ़ावा चोरी मामले में दर्ज एफआईआर के बाद बड़ा घटनाक्रम, एसआईटी जांच के बीच ट्रस्ट में शीर्ष स्तर पर बदलाव

चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद से दोनों पदाधिकारियों की भूमिका को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। इससे पहले शुक्रवार को पूरे दिन उनके इस्तीफे की चर्चाएं चलती रहीं, लेकिन अब ट्रस्ट की ओर से इसकी पुष्टि कर दी गई है।

एसआईटी रिपोर्ट के बाद दर्ज हुई थी एफआईआर

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला छह जून को सामने आया था। इसके बाद ट्रस्ट की मांग पर 13 जून को विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया। एसआईटी ने 23 जून को गृह विभाग को अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी, जिसमें एफआईआर दर्ज करने सहित कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की गई थीं।

रिपोर्ट के आधार पर राम जन्मभूमि थाने में चंपत राय के करीबी बताए जाने वाले रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय और रमाशंकर मिश्रा के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।

79.85 लाख रुपये बरामद, सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में

पुलिस ने सभी आरोपियों से रातभर पूछताछ की। पूछताछ और उनकी निशानदेही पर करीब 79.85 लाख रुपये बरामद किए गए। मेडिकल परीक्षण के बाद सभी आठ आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

चंपत राय और अनिल मिश्रा की भूमिका की जांच जारी

एसआईटी जांच के दौरान ट्रस्ट के दोनों वरिष्ठ पदाधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में बनी हुई है। विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने भी सार्वजनिक रूप से कहा था कि ट्रस्ट के दो सदस्यों पर आरोप हैं और जांच पूरी होने तक सभी तथ्यों की पड़ताल जरूरी है।

सूत्रों के अनुसार पुलिस यह भी जांच कर रही है कि मुख्य आरोपी टिन्नू यादव, जो चंपत राय के करीबी बताए जाते हैं, तथा अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा, जो डॉ. अनिल मिश्रा के रिश्तेदार बताए जाते हैं, उनकी भूमिका किस स्तर तक रही और क्या किसी प्रकार की प्रशासनिक या निगरानी संबंधी चूक हुई।

गोपाल राव की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल

मामले में मंदिर निर्माण सहायक गोपाल राव का नाम भी लगातार चर्चा में बना हुआ है। हालांकि वह न तो ट्रस्ट के सदस्य हैं और न ही पदाधिकारी, लेकिन मंदिर प्रबंधन के कई महत्वपूर्ण निर्णयों और गतिविधियों में उनकी सक्रिय भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे हैं। उनके एक रिश्तेदार का नाम भी जांच के दायरे में बताया जा रहा है, हालांकि अब तक उनके खिलाफ कोई औपचारिक कार्रवाई नहीं हुई है।

नृपेंद्र मिश्र ने जांच पूरी होने तक टिप्पणी से किया इनकार

श्रीराम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि जब तक एसआईटी की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक वह इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि अभी केवल प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आई है और जांच की प्रक्रिया जारी है। मीडिया में उनके नाम से चलाए जा रहे बयानों को उन्होंने भ्रामक बताया।

पुलिस की कार्रवाई पर भी उठे सवाल

मामले में एक और पहलू चर्चा का विषय बना हुआ है। आमतौर पर बड़ी गिरफ्तारियों के बाद पुलिस विस्तृत प्रेस ब्रीफिंग और आधिकारिक जानकारी साझा करती है, लेकिन इस मामले में पुलिस ने सीमित जानकारी ही सार्वजनिक की। अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. गौरव ग्रोवर ने केवल इतना कहा कि सभी आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, विवेचना जारी है और महत्वपूर्ण बरामदगी हुई है।

बैंक अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

सूत्रों के मुताबिक दान राशि की गणना और जमा प्रक्रिया में शामिल दो बैंक अधिकारियों तथा तीन-चार बैंक कर्मचारियों की संभावित भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस उनके बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों का मिलान कर रही है। इसी आधार पर मुकदमे में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराएं भी जोड़ी गई हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर आने वाले दिनों में मामले में और भी नाम सामने आ सकते हैं।

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *