नई दिल्ली, 21 जुलाई। राजधानी दिल्ली में 20 जुलाई को आयोजित ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान हुई हिंसा, पथराव, तोड़फोड़ और कानून-व्यवस्था से जुड़ी घटनाओं को लेकर दिल्ली पुलिस ने जांच तेज कर दी है। पुलिस ने अब तक चार एफआईआर दर्ज की हैं, जबकि दो अन्य मामलों में भी प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, मामले संसद मार्ग, कनॉट प्लेस और अन्य संबंधित थानों में दर्ज किए गए हैं। इनमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम तथा शस्त्र अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
एक एफआईआर कनॉट प्लेस स्थित रीगल सिनेमा के पास हुई हिंसा, पथराव और पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ की घटना से संबंधित है। अन्य मामलों में बिना अनुमति बड़ी संख्या में एकत्र होने, संसद सत्र के दौरान कथित रूप से ड्रोन उड़ाने तथा आपराधिक साजिश जैसे आरोप शामिल किए गए हैं।
पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान मारपीट, सरकारी कार्य में बाधा और कानून हाथ में लेने से जुड़े दो अन्य मामलों में भी जल्द एफआईआर दर्ज की जा सकती है। जांच एजेंसियां सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने में जुटी हैं।
संसद मार्ग थाने में दर्ज प्राथमिकी में कानूनी आदेशों की अवज्ञा, लोक सेवक के कार्य में बाधा, सरकारी कर्मचारी पर हमला, गैर-कानूनी जमावड़ा, दंगा, हिंसा, आपराधिक साजिश और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी धाराएं लगाई गई हैं।
उधर, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) द्वारा आयोजित मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस के कथित बल प्रयोग को लेकर दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने मामले को बुधवार के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया, जिससे कई छात्र घायल हुए। याचिका में यह भी दावा किया गया कि पार्टी कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो के साथ धक्का-मुक्की की गई। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उनके साथ दुर्व्यवहार की खबरें भ्रामक और तथ्यहीन हैं।
गौरतलब है कि 20 जुलाई को आयोजित ‘संसद चलो’ मार्च में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी शामिल हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी।
अब इस पूरे प्रकरण में पुलिस की जांच और दिल्ली हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।