ई-रजिस्ट्रेशन के खिलाफ वकीलों का अर्धनग्न प्रदर्शन

आगरा, 24 जून 2026 (यूएनएस)। ई-रजिस्ट्रेशन के खिलाफ वकीलों का गुस्सा थम नहीं रहा। इसका विरोध करते हुए वकीलों की 9वें दिन बुधवार को भी हड़ताल जारी रही। वकीलों ने अर्धनग्न प्रदर्शन करते हुए इसके खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। उन्होंने ऐलान किया है कि वे किसी भी कीमत पर ई-रजिस्ट्रेशन बर्दाश्त नहीं करेंगे।

इधर, वकीलों की हड़ताल के चलते 9वें दिन भी निबंधन विभागों में बैनामे नहीं हो सके। जमीन की खरीद-फरोख्त का काम पूरी तरह से रुका हुआ है।

ई-रजिस्ट्रेशन एवं फ्रंट ऑफिस व्यवस्था लागू किए जाने के विरोध में सदर तहसील, आगरा के अधिवक्तागण, दस्तावेज लेखकगण, स्टांप वेंडर्स एवं सहायकगण की हड़ताल बुधवार को भी जारी रही।

बुधवार दोपहर लगभग 3 बजे सदर तहसील के वकील निबंधन कार्यालय के बाहर एकत्रित हुए। उन्होंने अर्धनग्न अवस्था में ई-रजिस्ट्रेशन का विरोध किया। उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शंभूनाथ वर्मा एवं महासचिव अरविंद कुमार दुबे एडवोकेट के नेतृत्व में अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों एवं स्टांप वेंडर्स ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किया। इस अवसर पर दस्तावेज लेखक संघ के अध्यक्ष राम उपाध्याय, लाल बहादुर राजपूत तथा राजीव उपाध्याय के नेतृत्व में ई-रजिस्ट्रेशन का विरोध किया गया।

उत्तर प्रदेश सरकार ने संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और नागरिकों के अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश में ई-रजिस्ट्री व्यवस्था लागू की जा रही है, जिसके माध्यम से विकास प्राधिकरणों और आवास विकास परिषद की संपत्तियों की रजिस्ट्री अब ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिए संपन्न होगी।

नई व्यवस्था के लागू होने से लोगों को बार-बार निबंधन कार्यालय के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और पूरी प्रक्रिया अधिक तेज तथा सुविधाजनक बन सकेगी।

ई-रजिस्ट्री प्रणाली के तहत संबंधित संस्थाओं को लॉगिन आईडी और पासवर्ड उपलब्ध करा दिए गए हैं, जिससे वे अपनी संपत्तियों के पंजीकरण की प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से पूरा कर सकें।

नई व्यवस्था के अंतर्गत आवंटियों को रजिस्ट्री कराने के लिए निबंधन कार्यालय में लंबी कतारों में खड़े होने या बार-बार दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। संबंधित संस्था के कार्यालय में ही पूरी प्रक्रिया निर्धारित प्राधिकारी की निगरानी में संपन्न कराई जाएगी।

ई-रजिस्ट्री प्रक्रिया में बायोमेट्रिक सत्यापन, डिजिटल हस्ताक्षर और आधार आधारित ई-केवाईसी को अनिवार्य बनाया गया है। इससे आवंटी और संबंधित पक्षों की पहचान का सत्यापन सुरक्षित और विश्वसनीय तरीके से किया जा सकेगा। साथ ही, दस्तावेजों की प्रामाणिकता भी सुनिश्चित होगी।

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