स्मारक मित्रों के सहयोग से संवरेगी विरासत, पर्यटकों को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं: जयवीर सिंह

लखनऊ, 24 जून 2026 (यूएनएस)। राज्य पुरातत्व निदेशालय द्वारा प्रदेश की सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन एवं आम लोगों की भागीदारी के उद्देश्य से संचालित एडॉप्ट-ए-हेरिटेज पॉलिसी के अंतर्गत अब तक 5 स्मारकों—कुसुमवन सरोवर (मथुरा), रसखान की समाधि (मथुरा), पोतराकुंड (मथुरा), लक्ष्मी मंदिर (झांसी) तथा हुलासखेड़ा (लखनऊ) के लिए स्मारक मित्रों का चयन किया गया है।

पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप अगले चरण में 26 अन्य संरक्षित स्मारकों एवं प्राचीन स्थलों के लिए स्मारक मित्रों के चयन हेतु रुचि की अभिव्यक्ति (एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट) आमंत्रित करने की कार्यवाही की जा रही है।

निदेशालय का उद्देश्य प्रदेश की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप प्रदान करना तथा निजी एवं सामाजिक संस्थाओं की सहभागिता सुनिश्चित करना है। योजना के माध्यम से कॉर्पोरेट संस्थान, शैक्षणिक संस्थान, गैर-सरकारी संगठन तथा अन्य इच्छुक संस्थाएं स्मारकों के संरक्षण एवं पर्यटक सुविधाओं के विकास में सहभागिता कर सकेंगी।

उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व निदेशालय द्वारा प्रदेश के शेष संरक्षित स्मारकों एवं पुरास्थलों पर भी स्मारक मित्र नामित किए जाने की प्रक्रिया प्रारंभ की जा रही है। इस संबंध में इच्छुक संस्थाओं, औद्योगिक प्रतिष्ठानों, सामाजिक संगठनों एवं अन्य पात्र हितधारकों से प्रस्ताव आमंत्रित किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर हमारी समवेत चेतना के केंद्र हैं। ये स्मारक हमारे गौरवशाली इतिहास को समेटे हुए हैं। इनके संरक्षण के प्रति जनमानस में चेतना जगाना आवश्यक है। इसी दृष्टिकोण को अपनाते हुए पुरातत्व निदेशालय स्मारक मित्रों को जोड़कर इनके अस्तित्व को बचाए रखने का कार्य कर रहा है।

एडॉप्ट-ए-हेरिटेज पॉलिसी के अंतर्गत प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ-साथ पर्यटन विकास के क्षेत्र में एक नया आयाम स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। इस योजना से जनता की सहभागिता बढ़ेगी तथा प्राचीन विरासत के संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता उत्पन्न होगी।

इन स्थलों पर बुनियादी सुविधाएं सुलभ हो जाने से पर्यटन को रफ्तार मिलेगी। युवा पीढ़ी को इन स्थलों के ऐतिहासिक महत्व तथा उनकी महत्ता के बारे में जानकारी प्राप्त होगी।

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *