ई-साइकिल परियोजना फ्लॉप, टर्बन मोबिलिटी का अनुबंध निरस्त; कंपनी पर जुर्माना और दो साल की ब्लैकलिस्टिंग

नोएडा, 18 अप्रैल 2026 (यूएनएस)। पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई ई-साइकिल परियोजना चार महीने में ही फ्लॉप साबित हो गई। शासन द्वारा रिपोर्ट तलब किए जाने के बाद नोएडा प्राधिकरण ने आनन-फानन में संचालन कंपनी टर्बन मोबिलिटी का अनुबंध निरस्त कर दिया। साथ ही कंपनी पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए उसे दो साल के लिए ब्लैकलिस्ट भी कर दिया गया है।

परियोजना का उद्देश्य और विफलता

यह परियोजना वर्ष 2023 में नोएडा स्थापना दिवस पर तत्कालीन सीईओ रितु माहेश्वरी द्वारा शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य शहर में कार्यालय आने-जाने वाले लोगों को सस्ती और पर्यावरण अनुकूल परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना था।

हालांकि, आरोप है कि कंपनी ने परियोजना को लागू करने में कोई ठोस काम नहीं किया, जिसके कारण यह योजना महज चार महीने में ही ठप हो गई।

एग्रीमेंट में गड़बड़ी और अवैध विज्ञापन

जांच में सामने आया कि कंपनी ने नोएडा ट्रैफिक सेल (एनटीसी) के कुछ अधिकारियों से मिलीभगत कर बिना सीईओ की अनुमति के अनुबंध में बदलाव करा लिया। ई-साइकिल संचालन के बजाय डाक स्टेशनों पर यूनिपोल लगाकर अवैध विज्ञापन शुरू कर दिए गए।

शिकायत मिलने पर प्राधिकरण ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की, जिसने कई अनियमितताओं को उजागर किया। समिति ने यह भी जांच की कि कंपनी ने एग्रीमेंट के अनुसार निर्धारित स्थानों पर ही विज्ञापन लगाए या उससे अधिक स्थानों पर भी नियमों का उल्लंघन किया।

शासन के निर्देश के बाद कार्रवाई

प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी सतीश पाल ने बताया कि कंपनी अनुबंध के अनुसार कार्य नहीं कर रही थी, जिसके चलते फाइलों की गहन जांच की गई।

जांच के दौरान एनटीसी के महाप्रबंधक एसपी सिंह से भी जवाब मांगा गया कि कंपनी एग्रीमेंट के अनुसार काम कर रही है या नहीं और फाइल प्रक्रिया में कहां-कहां खामियां रहीं।

दो दिन पहले शासन द्वारा इस पूरे मामले में रिपोर्ट मांगे जाने के बाद प्राधिकरण ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कंपनी का अनुबंध रद्द कर दिया।

जुर्माना और ब्लैकलिस्टिंग

प्राधिकरण के महाप्रबंधक एसपी सिंह ने बताया कि कंपनी पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है और उसे अगले दो वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है।

इस कार्रवाई के बाद ई-साइकिल परियोजना की विफलता और उसमें हुई अनियमितताओं को लेकर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

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