महिला आरक्षण बिल पर सियासत तेज: पीएम मोदी बोले—“विपक्ष को भुगतना पड़ेगा”, गांव-गांव तक ले जाएंगे मुद्दा

प्रधानमंत्री मोदी ने इमैनुएल मैक्रों (फ्रांस), शाह अब्दुल्ला द्वितीय (जॉर्डन), हैथम बिन तारिक (ओमान) और अनवर इब्राहिम (मलेशिया) से अलग-अलग टेलीफोन वार्ता की

नई दिल्ली। लोकसभा में 131वें संविधान संशोधन विधेयक के पारित न हो पाने के बाद महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कैबिनेट बैठक में विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि महिला आरक्षण बिल का समर्थन न करना विपक्ष की बड़ी गलती है और उसे इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा।

सूत्रों के अनुसार, पीएम मोदी ने कहा कि विपक्ष ने देश की महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ काम किया है। उन्होंने निर्देश दिया कि इस मुद्दे को “जन-जन और गांव-गांव तक” पहुंचाया जाए, ताकि लोगों को सच्चाई से अवगत कराया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष को अब महिलाओं को जवाब देना होगा।

बिल को नहीं मिला दो-तिहाई बहुमत

गौरतलब है कि लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 पर हुई वोटिंग में कुल 528 सांसदों ने हिस्सा लिया। इनमें 298 ने समर्थन और 230 ने विरोध में मतदान किया। हालांकि, विधेयक को पारित करने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत (352 वोट) नहीं मिल सका, जिसके चलते यह पास नहीं हो पाया।

यह विधेयक 2029 से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने से संबंधित था। इसके साथ सरकार ने परिसीमन विधेयक और संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक भी पेश किए थे, जिन्हें बाद में आगे नहीं बढ़ाया गया।

किरेन रिजिजू का विपक्ष पर हमला

इस मुद्दे पर संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने भी कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह सरकार की नहीं, बल्कि विपक्ष की विफलता है, जिससे देश की महिलाओं को नुकसान हुआ है।

रिजिजू ने कहा, “हम सभी दुखी हैं कि महिला आरक्षण बिल में संशोधन नहीं हो सका। कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने इसे पारित नहीं होने दिया, जो देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।” उन्होंने इसे कांग्रेस के माथे पर “काला धब्बा” करार दिया और कहा कि इस पर जश्न मनाना शर्मनाक है।

21 घंटे की बहस के बाद मतदान

बताया जा रहा है कि इन तीनों विधेयकों पर लोकसभा में करीब 21 घंटे तक चर्चा चली, जिसमें बड़ी संख्या में सांसदों ने हिस्सा लिया। इसके बाद 131वें संशोधन विधेयक पर मतदान कराया गया, लेकिन पर्याप्त समर्थन न मिलने से यह गिर गया।

आगे की राजनीतिक रणनीति

महिला आरक्षण बिल पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। जहां सरकार इसे महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक और संवैधानिक मुद्दों से जोड़कर विरोध कर रहा है।

अब यह मुद्दा संसद से निकलकर सड़कों और जनता के बीच पहुंचने की तैयारी में है, जिससे आने वाले समय में राजनीतिक माहौल और गर्म होने के संकेत मिल रहे हैं।

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