काकोरी ट्रेन एक्शन के महानायक राजेंद्रनाथ लाहिड़ी की जयंती पर मुख्यमंत्री योगी ने दी श्रद्धांजलि, कहा- उनका बलिदान सदैव करेगा राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित

लखनऊ, 29 जून। काकोरी ट्रेन एक्शन के महानायक और अमर क्रांतिकारी शहीद राजेंद्रनाथ लाहिड़ी की जयंती पर सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए उनका सर्वोच्च बलिदान देश के युवाओं को सदैव राष्ट्रभक्ति, त्याग और राष्ट्रसेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता रहेगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने संदेश में लिखा, “क्रांति पथ के अडिग राही, काकोरी ट्रेन एक्शन के महानायक राजेंद्रनाथ लाहिड़ी की जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि। मातृभूमि की स्वतंत्रता हेतु उनका सर्वोच्च बलिदान राष्ट्र के युवाओं को सदैव देशभक्ति, त्याग और राष्ट्रसेवा के मार्ग पर चलने हेतु प्रेरित करता रहेगा।”

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक ने भी किया नमन; काकोरी ट्रेन एक्शन के इतिहास को किया याद

राजेंद्रनाथ लाहिड़ी की जयंती पर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि अमर क्रांतिकारी राजेंद्रनाथ लाहिड़ी का अदम्य साहस, राष्ट्रभक्ति और बलिदान की अमर गाथा आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करती रहेगी। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले इस महान क्रांतिकारी को कोटि-कोटि नमन।

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी शहीद राजेंद्रनाथ लाहिड़ी को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि वे मां भारती के वीर सपूत और अदम्य साहस के प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि लाहिड़ी ने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देकर राष्ट्रभक्ति, त्याग और वीरता की अमर गाथा लिखी। उनका राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण आज भी युवा पीढ़ी को कर्तव्यपथ पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है।

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी अपने संदेश में राजेंद्रनाथ लाहिड़ी को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का युवा क्रांतिकारी और जागृत भारतीय स्वाभिमान का प्रतीक बताते हुए उन्हें शत-शत नमन किया।

बंगाल से काशी तक का सफर, फिर क्रांति के पथ पर अग्रसर

राजेंद्रनाथ लाहिड़ी का जन्म 29 जून 1901 को तत्कालीन बंगाल प्रांत (वर्तमान बांग्लादेश) के पाबना जिले के मोहनपुर गांव में हुआ था। बचपन में ही पारिवारिक परिस्थितियों के कारण वे अपने मामा के पास वाराणसी आ गए। काशी हिंदू विश्वविद्यालय में शिक्षा के दौरान उनका संपर्क क्रांतिकारी विचारधारा से हुआ। उस समय वाराणसी देश की क्रांतिकारी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था और यहीं से उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की।

काकोरी ट्रेन एक्शन के प्रमुख नायक थे लाहिड़ी

ब्रिटिश शासन के खिलाफ सशस्त्र क्रांति के लिए संसाधन जुटाने के उद्देश्य से हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (एचआरए) के क्रांतिकारियों ने 9 अगस्त 1925 को काकोरी रेलवे स्टेशन के निकट सहारनपुर-लखनऊ पैसेंजर ट्रेन से सरकारी खजाना अपने कब्जे में लिया। इस ऐतिहासिक कार्रवाई में पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, ठाकुर रोशन सिंह और राजेंद्रनाथ लाहिड़ी सहित कई क्रांतिकारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

क्रांतिकारियों का उद्देश्य सरकारी धन का उपयोग अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष के लिए हथियार खरीदने में करना था। ब्रिटिश सरकार ने इस घटना को ‘काकोरी कांड’ या डकैती का नाम देकर सभी क्रांतिकारियों पर मुकदमा चलाया, जबकि उत्तर प्रदेश सरकार ने बाद में इस ऐतिहासिक घटना को ‘काकोरी ट्रेन एक्शन’ के नाम से मान्यता दी।

निर्धारित तिथि से पहले दी गई थी फांसी

काकोरी प्रकरण में राजेंद्रनाथ लाहिड़ी, राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां और ठाकुर रोशन सिंह को फांसी की सजा सुनाई गई। राजेंद्रनाथ लाहिड़ी को गोंडा जेल में रखा गया। ब्रिटिश प्रशासन को आशंका थी कि उन्हें छुड़ाने का प्रयास किया जा सकता है, इसलिए निर्धारित तिथि से पहले 17 दिसंबर 1927 को उन्हें फांसी दे दी गई। इसके दो दिन बाद 19 दिसंबर 1927 को राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां और ठाकुर रोशन सिंह को अलग-अलग जेलों में फांसी दी गई।

आज भी प्रेरणा का स्रोत हैं राजेंद्रनाथ लाहिड़ी

स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में राजेंद्रनाथ लाहिड़ी का नाम अदम्य साहस, राष्ट्रभक्ति और सर्वोच्च बलिदान के प्रतीक के रूप में दर्ज है। काकोरी ट्रेन एक्शन में उनकी भूमिका और देश की आजादी के लिए दिया गया उनका बलिदान भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के स्वर्णिम अध्यायों में शामिल है। उनकी जयंती पर प्रदेश भर में विभिन्न संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके आदर्शों को स्मरण किया।

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