नयी दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि परिसीमन (डिलिमिटेशन) की प्रक्रिया देश के लिए “राजनीतिक नोटबंदी” साबित हो सकती है।
लोकसभा में चर्चा के दौरान थरूर ने संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक 2026 पर अपनी बात रखते हुए कहा कि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना महिलाओं की आकांक्षाओं को एक जटिल और विवादास्पद प्रक्रिया में “बंधक” बनाने जैसा है।
उन्होंने कहा कि देश में महिला आरक्षण को लेकर लगभग सभी दलों के बीच सहमति है और इसे तुरंत लागू किया जा सकता है। थरूर ने आरोप लगाया कि सरकार ने इसे अनावश्यक शर्तों से जोड़ दिया है, जैसे 2011 की जनगणना के आंकड़ों का उपयोग, संसद सत्र का विस्तार और परिसीमन की प्रक्रिया।
थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का हवाला देते हुए कहा कि सरकार महिला सशक्तीकरण की बात तो करती है, लेकिन उसे “कंटीले तारों में लपेट” दिया गया है। उन्होंने कहा कि “महिला आरक्षण की फसल कटने को तैयार है, इसे मौजूदा सीटों के आधार पर तुरंत लागू किया जाना चाहिए।”
उन्होंने नोटबंदी का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह जल्दबाजी में लिया गया फैसला देश के लिए नुकसानदेह साबित हुआ, उसी तरह बिना व्यापक चर्चा के परिसीमन लागू करना भी गंभीर परिणाम ला सकता है।
थरूर ने कहा कि परिसीमन जैसे संवेदनशील विषय पर छोटे और बड़े राज्यों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है, खासकर तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों के हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है।
इसके साथ ही उन्होंने चिंता जताई कि यदि संसद में सदस्यों की संख्या बढ़कर 850 तक पहुंचती है, तो सदन का संचालन और सभी सांसदों को बोलने का पर्याप्त समय देना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।
अंत में थरूर ने सरकार से इन विधेयकों को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने की मांग की, ताकि इस पर विस्तृत और संतुलित विचार-विमर्श हो सके।
