वाशिंगटन, 17 अप्रैल 2026 (यूएनएस)। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी सख्ती को और बढ़ाते हुए दुनिया भर में तैनात अपनी सेनाओं को ऐसे किसी भी जहाज को रोकने, तलाशी लेने और आवश्यक होने पर सामान जब्त करने का अधिकार दे दिया है, जो ईरान से जुड़ा हो या उसे मदद पहुंचाने का संदेह हो।
अमेरिकी सेना के शीर्ष अधिकारी डैन केन ने बताया कि यह कार्रवाई विशेष रूप से उन जहाजों पर केंद्रित होगी, जो हथियार, तेल, धातु या इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसी सामग्री लेकर जा रहे हों। उन्होंने कहा कि प्रशांत क्षेत्र समेत अन्य इलाकों में भी तैनात अमेरिकी बल अब सक्रिय रूप से ऐसे जहाजों की निगरानी और कार्रवाई करेंगे।
रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाज भी इस कार्रवाई के दायरे में हैं। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि नाकाबंदी लागू होने से पहले इस मार्ग से निकल चुके जहाजों को भी रोका जा सकता है।
पेंटागन में जारी निर्देशों के अनुसार, अमेरिकी सेना को यह अधिकार दिया गया है कि वह किसी भी स्थान पर वाणिज्यिक जहाजों पर चढ़कर उनकी तलाशी ले सकती है और यदि सामान सैन्य उपयोग का संदेह पैदा करता है, तो उसे जब्त भी कर सकती है।
प्रतिबंधित वस्तुओं की सूची में हथियार और गोला-बारूद पूरी तरह प्रतिबंधित श्रेणी में हैं, जबकि तेल, लोहा, इस्पात और एल्युमिनियम जैसी वस्तुओं को शर्तीय रूप से प्रतिबंधित रखा गया है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और भारी मशीनरी भी जांच के दायरे में आएंगे।
अमेरिका की इस नई रणनीति को तेहरान पर दबाव बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। रक्षा अधिकारियों के अनुसार, नाकाबंदी लागू कराने के लिए 10,000 से अधिक सैनिक तैनात किए गए हैं।
यूएस सेंट्रल कमांड के मुताबिक, कार्रवाई के शुरुआती तीन दिनों में ही 14 जहाज नाकाबंदी का सामना करने के बजाय वापस लौट गए। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि कोई जहाज भागने की कोशिश करता है, तो पहले चेतावनी दी जाएगी और जरूरत पड़ने पर बल प्रयोग भी किया जा सकता है।
माना जा रहा है कि यह कदम क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकता है, खासकर ऐसे समय में जब युद्धविराम की अवधि समाप्त होने के करीब है और कूटनीतिक प्रयास जारी हैं।
