भारत में नोएडा से औद्योगिक अशांति, दिल्ली-एनसीआर के कई राज्यों में फैली


डॉ. ज्ञान पाठक

जैसे-जैसे भारत सरकार धीरे-धीरे नई श्रम संहिताओं के नियमों को लागू कर रही है, भारतीय कामगारों में तनाव बढ़ता जा रहा है। सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से इसे पूरी तरह लागू करने का इरादा जताया था, और अब 13 अप्रैल 2026 को उत्तर प्रदेश के नोएडा में औद्योगिक अशांति शुरू हो गई, जो तेजी से दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में फैल गई। इसमें हरियाणा के फरीदाबाद और मानेसर (गुरुग्राम), राजस्थान के भिवाड़ी और दिल्ली समेत कई इलाके शामिल हैं।

औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों ने न्यूनतम वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर सड़क जाम कर दी। कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया, जिसमें गाड़ियों में आगजनी, पुलिस से झड़प, पथराव और फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया और कई जगहों पर लाठीचार्ज भी किया गया। पुलिस का कहना है कि स्थिति को काबू में रखने के लिए न्यूनतम बल का उपयोग किया जा रहा है।

नोएडा में विरोध के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को मजदूरों को भड़काने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने चेतावनी दी कि लगभग समाप्त हो चुके नक्सलवाद को फिर से जिंदा करने की साजिश से सावधान रहना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि मजदूरों के नाम पर उपद्रव करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए और औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ाई जानी चाहिए।

साथ ही मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि हर मजदूर को सम्मानजनक वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल और मूलभूत सुविधाएं मिलनी चाहिए। उन्होंने औद्योगिक इकाइयों से श्रम कानूनों का पालन करने और मजदूरों की समस्याओं का समाधान करने की अपील की।

उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने कहा कि हिंसा भड़काने वाले तत्वों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने बताया कि अशांति में शामिल “भड़काऊ” और “बाहरी” तत्वों की जांच की जा रही है। वहीं, उत्तर प्रदेश एटीएस ने भी संभावित साजिश और बाहरी हस्तक्षेप के एंगल से जांच शुरू कर दी है।

इस बीच समाजवादी पार्टी के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने हिंसक विरोध के लिए भाजपा सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पूंजीपतियों का पक्ष लेती है और मजदूरों की अनदेखी करती है। उन्होंने कहा कि वेतन बढ़ाने का आंदोलन सरकार की गलत नीतियों के कारण उग्र हुआ है।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने भी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि महंगाई और कम वेतन के कारण मजदूर सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि केवल विज्ञापनों से लोगों का पेट नहीं भर सकता और मजदूरों की जायज मांगों को नजरअंदाज करना बंद करना होगा।

प्रदर्शन के दौरान मदरसन कंपनी के सैकड़ों मजदूर फैक्ट्री के अंदर घुस गए और अधिकारियों को बाहर नहीं जाने दिया। नोएडा के फेज-2 क्षेत्र में प्रदर्शन हिंसक हो गया, जहां पुलिस वाहन समेत कई गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई।

12 अप्रैल को प्रशासन ने साप्ताहिक अवकाश, ओवरटाइम के लिए दोगुना भुगतान, बोनस और बेहतर सुरक्षा जैसे उपायों की घोषणा की थी। इससे पहले नोएडा की जिला मजिस्ट्रेट मेधा रूपम ने मजदूरों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की थी।

हरियाणा सरकार द्वारा 9 अप्रैल को न्यूनतम मजदूरी में 35 प्रतिशत बढ़ोतरी की घोषणा के बाद यह आंदोलन और तेज हो गया। इसके बाद नोएडा और अन्य क्षेत्रों में भी मजदूरों ने समान मांगें उठानी शुरू कर दीं।

प्रदर्शन का असर दिल्ली तक पहुंच गया, जहां पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा गया और सीमाओं पर कड़ी निगरानी की गई। चिल्ला बॉर्डर और अन्य प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक बुरी तरह प्रभावित हुआ। फरीदाबाद और भिवाड़ी में भी हालात तनावपूर्ण रहे, जहां पुलिस को कई जगह लाठीचार्ज करना पड़ा और कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।

यह औद्योगिक अशांति अब एक बड़े क्षेत्रीय संकट का रूप लेती दिख रही है, जिससे सरकार और प्रशासन दोनों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *