नई दिल्ली। नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा में महिला आरक्षण अधिनियम से जुड़े संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक 2026 पर चर्चा के दौरान सभी राजनीतिक दलों से इसका समर्थन करने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं है और जो इसका विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्र के जीवन में कुछ ऐसे महत्वपूर्ण क्षण आते हैं, जो इतिहास में धरोहर बन जाते हैं और आज का दिन भी संसद के इतिहास में वैसा ही एक पल है। उन्होंने कहा कि महिला अधिकारों का विरोध करने वालों को पहले भी जनता, खासकर महिलाओं ने माफ नहीं किया है।
नरेन्द्र मोदी ने कहा कि यदि 25-30 साल पहले ही महिला आरक्षण को लागू कर दिया गया होता, तो आज यह और अधिक परिपक्व रूप में सामने आता। उन्होंने कहा कि भारत “मदर ऑफ डेमोक्रेसी” रहा है और इसकी हजारों साल की विकास यात्रा रही है, ऐसे में महिला सशक्तिकरण की दिशा में यह कदम बेहद महत्वपूर्ण है।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि कुछ लोग इस मुद्दे में राजनीतिक लाभ-हानि देख रहे हैं, लेकिन उन्हें अतीत के परिणामों से सीख लेनी चाहिए। उन्होंने दोहराया कि यह विषय राजनीति से ऊपर उठकर देखने का है।
इससे पहले लोकसभा में इन अहम विधेयकों पर चर्चा की शुरुआत अर्जुन राम मेघवाल ने की। उन्होंने कहा कि संविधान संशोधन विधेयक 2026 देश में लैंगिक समानता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है और इससे किसी भी राज्य को कोई नुकसान नहीं होगा।
संसद में चल रही इस बहस को देश की राजनीति और सामाजिक बदलाव के लिहाज से एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।
