बसपा के पुराने चेहरों के सहारे पीडीए को मजबूत करने में जुटी सपा, 2027 चुनाव की तैयारी तेज

लखनऊ, 27 अप्रैल 2026 (यूएनएस)। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपनी पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति को धार देने के लिए बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के पुराने और अनुभवी नेताओं को साथ जोड़ने की कवायद शुरू कर दी है।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, सपा प्रमुख अखिलेश यादव के नेतृत्व में तैयार की गई यह रणनीति 2027 के चुनाव में सत्ता में वापसी के लक्ष्य को ध्यान में रखकर बनाई गई है। सपा का मानना है कि भीमराव अंबेडकर और कांशीराम की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए बसपा के जमीनी और अनुभवी नेताओं को साथ लाना जरूरी है।

इसी क्रम में सपा ने कई प्रमुख पूर्व बसपा नेताओं को अपने साथ जोड़ा है, जिनमें इंद्रजीत सरोज, नसीमुद्दीन सिद्दीकी, लालजी वर्मा, रामअचल राजभर, त्रिभुवन दत्त और ददूदू प्रसाद जैसे नाम शामिल हैं। ये सभी नेता कभी बसपा के मजबूत स्तंभ रहे हैं और सामाजिक समीकरणों की गहरी समझ रखते हैं।

सूत्रों का कहना है कि सपा की पीडीए रणनीति का आधार यही नेता बन रहे हैं, जो न केवल इसे वैचारिक मजबूती दे रहे हैं, बल्कि जमीनी स्तर पर इसे लागू करने में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। सपा का आकलन है कि वर्तमान में बसपा अपने पारंपरिक वोट बैंक तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पा रही है, जिससे उत्पन्न राजनीतिक खाली स्थान को भरने की कोशिश की जा रही है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में सपा और बसपा के रिश्ते हमेशा उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। 1993 में दोनों दलों का गठबंधन सफल रहा, जबकि 2019 में दोबारा साथ आने के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सके। इसके बाद सपा ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए सामाजिक समीकरणों पर नए सिरे से काम शुरू किया।

पार्टी अब दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक वर्गों के व्यापक गठजोड़ पर जोर दे रही है। नेताओं का मानना है कि बसपा के पूर्व नेताओं को साथ जोड़ना इसी रणनीति का अहम हिस्सा है, क्योंकि ये जमीनी स्तर पर जातीय समीकरण साधने में सक्षम हैं।

हालांकि, इस रणनीति के संकेत 2024 के लोकसभा चुनाव में भी देखने को मिले, जहां सपा ने बेहतर प्रदर्शन किया। यही वजह है कि पार्टी अब इस मॉडल को और विस्तार देने में जुटी है। सूत्रों के अनुसार, बसपा के कई पूर्व प्रत्याशी और प्रभावशाली नेता, जिनकी विचारधारा भाजपा से मेल नहीं खाती, वे भी धीरे-धीरे सपा की ओर रुख कर रहे हैं।

वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सपा की इस रणनीति को लेकर पलटवार किया है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अवनीश त्यागी का कहना है कि सपा चाहे जितने प्रयास कर ले, प्रदेश की जनता का विश्वास योगी आदित्यनाथ और नरेंद्र मोदी पर कायम है और 2027 में भी भाजपा भारी बहुमत से सरकार बनाएगी।

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