लखनऊ, 29 जून। उत्तर प्रदेश में प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत बनाने की दिशा में योगी सरकार ने वेटलैंड (आर्द्रभूमि) संरक्षण अभियान को तेज कर दिया है। वेटलैंड (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम-2017 के तहत प्रदेशभर में आर्द्रभूमियों की पहचान, सीमांकन और अधिसूचना की प्रक्रिया में तेजी लाई गई है। अब तक 26 जिलों की 101 आर्द्रभूमियों को अधिसूचित किया जा चुका है, जबकि 36 जिलों से 44 नई आर्द्रभूमियों को अधिसूचित किए जाने के प्रस्ताव शासन को प्राप्त हुए हैं।
मुख्य सचिव के समक्ष प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, अधिसूचित 101 आर्द्रभूमियों का कुल क्षेत्रफल लगभग 2,750 हेक्टेयर है। इनमें कानपुर नगर, गोरखपुर, बाराबंकी, महाराजगंज, प्रयागराज, आगरा, सहारनपुर, कुशीनगर, उन्नाव सहित कई जिलों की महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियां शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य इन प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण कर जल सुरक्षा, जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन को दीर्घकाल तक सुरक्षित रखना है।
14,562 स्थानों पर हुआ सीमांकन, रामसर साइट का दर्जा दिलाने की दिशा में भी तेज हुई तैयारी
राज्य सरकार का मानना है कि आर्द्रभूमियां केवल तालाब, झील या जलभराव वाले क्षेत्र नहीं हैं, बल्कि प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। ये भूजल स्तर को बनाए रखने, पेयजल स्रोतों को संरक्षित करने, सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने, बाढ़ एवं सूखे के प्रभाव को कम करने तथा मत्स्य पालन को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाती हैं। इसके साथ ही ये प्रवासी पक्षियों और अन्य वन्यजीवों के लिए सुरक्षित प्राकृतिक आवास भी उपलब्ध कराती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में भी आर्द्रभूमियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
सरकार ने आर्द्रभूमियों को अतिक्रमण और अवैध कब्जों से सुरक्षित रखने के लिए वैज्ञानिक तरीके से सीमांकन कराने पर विशेष जोर दिया है। इसी क्रम में प्रदेश के सभी 75 जिलों में कुल 14,562 स्थानों पर सीमा निर्धारण का कार्य पूरा किया जा चुका है। स्पष्ट सीमांकन होने से संरक्षण संबंधी कार्यों को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने और प्राकृतिक जल स्रोतों को दीर्घकाल तक सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
प्रदेश सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों को पहचान दिलाने की दिशा में सक्रिय है। इसके लिए चयनित आर्द्रभूमियों को रामसर साइट का दर्जा दिलाने हेतु आवश्यक दस्तावेज, मानचित्र, फोटोग्राफ और तकनीकी विवरण तैयार किए जा रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि अधिक से अधिक आर्द्रभूमियां रामसर सूची में शामिल हों, जिससे उनके संरक्षण के लिए वैश्विक सहयोग और तकनीकी सहायता भी प्राप्त हो सके।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण, अतिक्रमण और जलवायु परिवर्तन के दौर में आर्द्रभूमियों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक हो गया है। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना, सीमांकन और वैज्ञानिक प्रबंधन की दिशा में उठाए जा रहे कदम प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ-साथ भविष्य की जल सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं.
