लखनऊ, 10 मई। योगी आदित्यनाथ सरकार का बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार रविवार को लखनऊ में संपन्न हुआ। लोकभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में आनंदीबेन पटेल ने नए मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस विस्तार को वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की महत्वपूर्ण राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
नए मंत्रियों के रूप में भूपेंद्र चौधरी, कृष्णा पासवान, हंसराज विश्वकर्मा, मनोज पांडेय, कैलाश राजपूत और सुरेंद्र दिलेर ने शपथ ली। इसके अलावा सोमेंद्र तोमर और अजीत सिंह पाल को पदोन्नति देते हुए कैबिनेट स्तर की जिम्मेदारी सौंपी गई।
मंत्रिमंडल विस्तार में सामाजिक और जातीय संतुलन पर विशेष ध्यान दिया गया है। नए मंत्रियों में ब्राह्मण, ओबीसी और दलित समुदायों के प्रतिनिधियों को शामिल कर भाजपा ने विभिन्न सामाजिक वर्गों को साधने का प्रयास किया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय समीकरण हमेशा अहम भूमिका निभाते रहे हैं और इसी को ध्यान में रखते हुए यह विस्तार किया गया है।
इससे एक दिन पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनभवन पहुंचकर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मुलाकात की थी। इसके बाद से ही मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं तेज हो गई थीं। लंबे समय से कैबिनेट विस्तार को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलें लगाई जा रही थीं, जिन पर अब विराम लग गया है।
भाजपा ने इस फेरबदल के जरिए संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल का संदेश देने की कोशिश भी की है। पार्टी सूत्रों के अनुसार आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए ऐसे नेताओं को प्राथमिकता दी गई है, जिनका अपने-अपने क्षेत्रों और सामाजिक समूहों में प्रभाव माना जाता है।
मौजूदा मंत्रियों सोमेंद्र तोमर और अजीत सिंह पाल को प्रमोट कर कैबिनेट मंत्री बनाया जाना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी इसे उनके प्रदर्शन और संगठन में सक्रिय भूमिका का परिणाम बता रही है।
वहीं मंत्रिमंडल विस्तार के बाद महोबा से विधायक आशा मौर्य की नाराजगी भी सामने आई। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि वर्षों से संगठन के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं की अनदेखी पीड़ादायक है। हालांकि भाजपा की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विस्तार केवल प्रशासनिक आवश्यकता नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी का हिस्सा है। भाजपा नए चेहरों को आगे लाकर और सामाजिक संतुलन साधकर अपना जनाधार मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।
योगी कैबिनेट का यह विस्तार भाजपा की उस रणनीति का संकेत माना जा रहा है, जिसमें सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर नए संदेश देने की कोशिश की जा रही है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि नए मंत्री सरकार के कामकाज और चुनावी राजनीति में कितना असर छोड़ पाते हैं।
