लखनऊ, 28 जून 2026 (यूएनएस)। उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण रोजगार और आजीविका को नई दिशा देने की तैयारी पूरी कर ली है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के निर्देश पर ग्राम्य विकास विभाग ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के स्थान पर “वी.बी.जी. राम जी (विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन-ग्रामीण) योजना” को लागू करने की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। यह नई योजना 1 जुलाई 2026 से पूरे देश के साथ उत्तर प्रदेश में भी प्रभावी हो जाएगी।
प्रदेश सरकार का दावा है कि नई योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, आजीविका संवर्धन, आधारभूत ढांचे के विकास और डिजिटल पारदर्शिता को नई गति देगी। इसके तहत पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की निगरानी और क्रियान्वयन को और अधिक व्यवस्थित बनाया जाएगा।
2 जुलाई को होगा राज्यव्यापी शुभारंभ
योजना के औपचारिक शुभारंभ के अवसर पर 2 जुलाई को प्रदेशभर में व्यापक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उसी दिन आंध्र प्रदेश के तिरुपति में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्रीय स्तर पर योजना का शुभारंभ होगा। इसके समानांतर उत्तर प्रदेश के प्रत्येक विकासखंड की दो ग्राम पंचायतों में जन सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे।
इन सम्मेलनों में जनप्रतिनिधि, स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं, मनरेगा श्रमिक, ग्राम पंचायत प्रतिनिधि और ग्रामीण बड़ी संख्या में भाग लेंगे। कार्यक्रमों के दौरान नई योजना के अंतर्गत स्वीकृत विकास कार्यों की शुरुआत, विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं का प्रदर्शन तथा रोजगार और आजीविका से जुड़े विभिन्न प्रावधानों की जानकारी दी जाएगी।
प्रदेश में एक साथ शुरू होंगे 10 हजार विकास कार्य
ग्राम्य विकास विभाग ने 2 जुलाई को प्रदेशभर में 10,000 विकास कार्यों की शुरुआत का लक्ष्य निर्धारित किया है। विभाग के अनुसार सर्वाधिक कार्य आजमगढ़ (342), जौनपुर (337), गाजीपुर (326) और सीतापुर (319) जिलों में शुरू किए जाएंगे। इसके अलावा अन्य जिलों में भी बड़ी संख्या में सार्वजनिक परिसंपत्तियों के निर्माण, जल संरक्षण, ग्रामीण संपर्क मार्ग, सामुदायिक परिसंपत्तियों और आजीविका से जुड़े कार्य शुरू होंगे।
पंचायत स्तर पर बदले जाएंगे सभी साइन बोर्ड
योजना लागू होने के साथ ही ग्राम पंचायतों, विकासखंडों और जिला स्तर पर मनरेगा से संबंधित सभी साइन बोर्ड, सूचना पट्ट, कार्यालयीय अभिलेख और प्रचार सामग्री को अपडेट करने के निर्देश जारी किए गए हैं। अब इन पर “विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन-ग्रामीण योजना, उत्तर प्रदेश” अंकित किया जाएगा।
विभाग ने सभी जिलों को पोस्टर, बैनर, स्टैंडी और अन्य प्रचार सामग्री के माध्यम से ग्रामीणों को नई योजना की जानकारी देने के निर्देश दिए हैं।
125 दिनों के रोजगार पर रहेगा विशेष जोर
सरकार के अनुसार नई योजना का उद्देश्य केवल मजदूरी उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना भी है। योजना के प्रमुख बिंदुओं में—
- ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों तक रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था,
- आजीविका के स्थायी साधनों का विकास,
- विकसित ग्राम पंचायतों का निर्माण,
- डिजिटल मॉनिटरिंग और पारदर्शिता,
- विकेंद्रीकृत योजना निर्माण,
- सामुदायिक भागीदारी बढ़ाना,
- प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और ग्रामीण आधारभूत संरचना का विस्तार शामिल हैं।
अधिकारियों को दिए गए सख्त निर्देश
ग्राम्य विकास आयुक्त जी.एस. प्रियदर्शी ने सभी मुख्य विकास अधिकारियों और अतिरिक्त जिला कार्यक्रम समन्वयकों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि योजना के क्रियान्वयन में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने प्रत्येक विकासखंड में जन सम्मेलन सफलतापूर्वक आयोजित करने, नए कार्यों को समय पर शुरू कराने तथा योजना की जानकारी आम ग्रामीणों तक पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।
ग्रामीण विकास को नई दिशा देने का प्रयास
प्रदेश सरकार का मानना है कि नई योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की उपलब्धता बढ़ेगी, आधारभूत ढांचे का विकास तेज होगा और स्थानीय स्तर पर आजीविका के नए अवसर सृजित होंगे। सरकार इसे विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रही है। हालांकि योजना के प्रभाव और परिणाम इसके प्रभावी क्रियान्वयन तथा जमीनी स्तर पर कार्यों की गुणवत्ता पर निर्भर करेंगे।
