नई दिल्ली, 28 जून 2026 (यूएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से आगामी गणेश उत्सव के दौरान प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की जगह मिट्टी से बनी गणपति बप्पा की मूर्तियां खरीदने की अपील की है। उन्होंने कहा कि स्थानीय कुम्हारों और शिल्पकारों द्वारा तैयार की गई मिट्टी की मूर्तियां न केवल भारतीय परंपरा और संस्कृति का प्रतीक हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 135वें संस्करण में प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें देशभर से बड़ी संख्या में ऐसे पत्र प्राप्त हुए हैं, जिनमें लोगों ने गणेश उत्सव से पहले इस विषय पर चर्चा करने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा कि चूंकि गणेश प्रतिमाओं का निर्माण कई महीने पहले ही शुरू हो जाता है, इसलिए अभी से जागरूकता फैलाना आवश्यक है।
‘मन की बात’ में पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय कारीगरों के समर्थन का संदेश, पीओपी मूर्तियों से बचने की सलाह
प्रधानमंत्री ने कहा कि श्रद्धालुओं को गणपति की प्रतिमा खरीदते समय यह अवश्य सुनिश्चित करना चाहिए कि वह भारत की मिट्टी से बनी हो और किसी स्थानीय कुम्हार या कलाकार द्वारा तैयार की गई हो। उन्होंने कहा कि इससे देश के लाखों पारंपरिक कारीगरों और उनके परिवारों को आर्थिक संबल मिलेगा तथा ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को भी नई मजबूती मिलेगी।
उन्होंने पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि मिट्टी की प्रतिमाएं विसर्जन के बाद आसानी से जल में घुल-मिल जाती हैं, जिससे नदियों, तालाबों और अन्य जल स्रोतों को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। इसके विपरीत, प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी मूर्तियां लंबे समय तक पानी में बनी रहती हैं और जल प्रदूषण का कारण बनती हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय त्योहार केवल आस्था के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि प्रकृति और समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी का भी संदेश देते हैं। इसलिए प्रत्येक नागरिक को ऐसे विकल्प अपनाने चाहिए जो पर्यावरण के अनुकूल हों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करें।
उन्होंने देशवासियों से आग्रह किया कि केवल गणेश उत्सव ही नहीं, बल्कि अन्य त्योहारों और अवसरों पर भी स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दें तथा स्थानीय कारीगरों और छोटे उद्यमियों का समर्थन करें। प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यदि प्रत्येक परिवार स्थानीय स्तर पर निर्मित उत्पादों को अपनाएगा तो इससे देश की अर्थव्यवस्था, पारंपरिक कला और आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई गति मिलेगी।
