लखनऊ अग्निकांड में नया मोड़: निलंबित FSSO ने CFO पर लगाए गंभीर आरोप, बाद में जारी किया माफीनामा

इंदिरानगर फायर स्टेशन के सेकेंड ऑफिसर (FSSO) कमलेंद्र कुमार सिंह

लखनऊ, 24 जून (RNN)। राजधानी लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड को लेकर जांच और कार्रवाई के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है। घटना के बाद निलंबित किए गए इंदिरानगर फायर स्टेशन के सेकेंड ऑफिसर (FSSO) कमलेंद्र कुमार सिंह ने एक वीडियो संदेश और पत्र जारी कर फायर विभाग के मुख्य अग्निशमन अधिकारी (CFO) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि आग लगने के बाद राहत एवं बचाव कार्य में हुई देरी तथा विभागीय समन्वय की कमी के लिए मुख्य रूप से सीएफओ जिम्मेदार हैं।

कमलेंद्र कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र में कहा कि उनका निलंबन अन्यायपूर्ण है क्योंकि उनके अधिकार क्षेत्र में भवनों को फायर क्लियरेंस देना या सुरक्षा मानकों का अनुपालन सुनिश्चित कराना शामिल नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस भवन में हादसा हुआ, उसका लंबे समय से आवासीय स्वीकृति के बावजूद व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा था, जिसकी जानकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को होनी चाहिए थी।

पत्र में उन्होंने कहा कि आग लगने के बाद दमकल वाहनों के घटनास्थल तक पहुंचने में हुई देरी और राहत कार्यों में समन्वय की कमी सीधे तौर पर वरिष्ठ स्तर की लापरवाही को दर्शाती है। उन्होंने पूरे प्रकरण की जिम्मेदारी तय करते हुए सीएफओ के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग भी की।

वीडियो वायरल होने के बाद बदला रुख

कमलेंद्र कुमार सिंह का पत्र और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। कई लोगों ने इसे विभागीय जवाबदेही से जुड़ा मुद्दा बताते हुए सवाल उठाए कि क्या निचले स्तर के अधिकारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।

हालांकि विवाद बढ़ने के बाद कमलेंद्र कुमार सिंह का एक और वीडियो सामने आया, जिसमें उन्होंने अपने पहले बयान पर खेद व्यक्त किया। नए वीडियो में उन्होंने कहा कि उन्हें भ्रमित कर बयान दिलवाया गया था और उन्हें शासन तथा जांच प्रक्रिया पर पूरा विश्वास है। उन्होंने अपने पहले वीडियो को लेकर माफी भी मांगी।

45 मिनट की देरी पर उठे सवाल

अलीगंज अग्निकांड के बाद स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों ने भी दमकल विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगने के करीब 45 मिनट बाद दमकल की पहली गाड़ी मौके पर पहुंची। तब तक आग विकराल रूप ले चुकी थी और कई लोग इमारत में फंस गए थे।

राहत कार्य के दौरान पुलिसकर्मियों को हथौड़ों से दीवारें तोड़कर लोगों तक पहुंचने का प्रयास करना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि दमकल विभाग समय पर पहुंच जाता तो कुछ जानें बचाई जा सकती थीं।

जांच जारी, जिम्मेदारी तय होने का इंतजार

अलीगंज अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर विशेष जांच दल (एसआईटी) जांच कर रहा है। मामले में चार अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है और कई आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। अब पूरे प्रदेश की निगाहें एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस दर्दनाक हादसे के लिए वास्तविक जिम्मेदार कौन हैं और किस स्तर पर चूक हुई।

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