नई दिल्ली, 23 जून। नीट-यूजी पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था को लेकर देशभर में चर्चा का विषय बने सीजेपी आंदोलन पर कांग्रेस ने बड़ा बयान दिया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा है कि यह आंदोलन युवाओं की नाराजगी और उनकी भावनाओं का प्रतिबिंब है, लेकिन लोकतंत्र केवल आंदोलनों के सहारे नहीं चल सकता। युवाओं के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने और समाधान तक पहुंचाने की जिम्मेदारी आखिरकार राजनीतिक दलों को ही निभानी होगी।
एक साक्षात्कार में जयराम रमेश ने कहा कि सीजेपी को लेकर विभिन्न तरह की धारणाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे किसी सुनियोजित रणनीति का हिस्सा बताते हैं तो कुछ इसे युवाओं के असंतोष और गुस्से का परिणाम मानते हैं। उन्होंने कहा कि इसके पीछे की वास्तविकता चाहे जो भी हो, लेकिन इस आंदोलन ने देशभर के युवाओं की चिंताओं और भावनाओं को सामने लाने का महत्वपूर्ण काम किया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सीजेपी कोई राजनीतिक पार्टी नहीं है, बल्कि एक जन आंदोलन है। आंदोलनों की लोकतंत्र में अपनी अहम भूमिका होती है, लेकिन स्थायी बदलाव और नीतिगत फैसले राजनीतिक प्रक्रिया के माध्यम से ही संभव होते हैं। इसलिए युवाओं की आवाज को मजबूती देने के लिए राजनीतिक दलों को आगे आना होगा।
राहुल गांधी शिक्षा व्यवस्था के मुद्दे उठा रहे हैं
जयराम रमेश ने बताया कि कांग्रेस शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों की समस्याओं को लेकर देशव्यापी अभियान चला रही है। इसके तहत लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लगातार छात्रों और युवाओं से संवाद कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने कोटा में छात्रों से मुलाकात की थी, जबकि आगे प्रयागराज और पटना में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यह अभियान जुलाई के मध्य में दिल्ली में समाप्त होगा।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी केवल नीट या सीबीएसई परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की बात नहीं कर रहे, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की बुनियादी चुनौतियों को भी सामने ला रहे हैं। इनमें परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता, शिक्षा में सरकारी निवेश की कमी और बढ़ता निजीकरण प्रमुख मुद्दे हैं।
कोचिंग उद्योग पर उठाए गंभीर सवाल
कांग्रेस महासचिव ने कहा कि कोटा में राहुल गांधी ने एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया था। उन्होंने बताया कि आज देश के परिवार अपने बच्चों की कोचिंग पर जितना खर्च कर रहे हैं, वह कई मामलों में केंद्र सरकार के शिक्षा बजट से भी अधिक है। यह स्थिति शिक्षा व्यवस्था में गहरे असंतुलन और बढ़ती असमानता को दर्शाती है।
रमेश ने सवाल उठाया कि आखिर छात्रों को सफलता के लिए कोचिंग संस्थानों पर इतना निर्भर क्यों होना पड़ रहा है। मेडिकल शिक्षा इतनी महंगी क्यों हो गई है और शिक्षा का निजीकरण लगातार क्यों बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर देशव्यापी बहस और ठोस नीति निर्माण की जरूरत है।
जंतर-मंतर पर जारी है आंदोलन
इस बीच, दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी का धरना लगातार जारी है। आंदोलनकारी कथित नीट-यूजी पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। मंगलवार को प्रदर्शनकारियों ने ‘डायपर दान अभियान’ भी चलाया और कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।
शनिवार से शुरू हुए इस आंदोलन में छात्र, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी और विभिन्न छात्र संगठन शामिल हैं। हाल ही में 20 लाख से अधिक छात्रों द्वारा दोबारा नीट-यूजी परीक्षा दिए जाने के बाद यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया है।
कांग्रेस का मानना है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य से जुड़े सवाल केवल आंदोलन का विषय नहीं हैं, बल्कि इन्हें राष्ट्रीय राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। ऐसे में सीजेपी आंदोलन और कांग्रेस के अभियान ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर देश में नई बहस छेड़ दी है।
